Politics on SIR : सुप्रीम कोर्ट ने आज मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (SIR) के मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने चुनाव आयोग के अधिकार को बरकरार रखते हुए इस प्रक्रिया को संवैधानिक और कानूनी माना है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को इस मामले में क्लीन चिट देते हुए कहा कि एसआईआर कराना चुनाव आयोग का अधिकार है, इसमें कुछ भी दुरुपयोग नहीं हुआ है। इस फैसले के बाद राजनीति में हलचल मच गई है।
SIR पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर राजनीतिक बहस शुरू
भाजपा ने इस फैसले का स्वागत किया है और विपक्षी दलों पर राजनीति करने का आरोप लगाया है। भाजपा सांसद और प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया को पूरी तरह से संविधान के अनुसार घोषित कर दिया है। उन्होंने कहा कि अब विपक्ष खासकर कांग्रेस की नैतिक और संवैधानिक हार हो चुकी है। भाजपा का दावा है कि कांग्रेस और विपक्षी दल अपने आरोपों में झूठे हैं और यह प्रक्रिया पूरी तरह से सही है। भाजपा नेता कोहली ने भी कहा कि चुनाव आयोग समय-समय पर मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए यह प्रक्रिया चलाता है और यह लोकतंत्र की मूल आवश्यकता है।
कोर्ट ने राहुल गांधी को बेनकाब कर दिया – भाजपा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मतदाता सूची का यह पुनरीक्षण स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की जरूरी आवश्यकता को मजबूत करता है। कोर्ट ने माना कि चुनाव आयोग को इस तरह की प्रक्रिया चलाने का अधिकार है। इस फैसले के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। भाजपा के नेता प्रदीप भंडारी ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी बेनकाब हो गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अवैध मतदाताओं के साथ खड़ी थी और अब अदालत के फैसले से यह साफ हो गया है कि चुनाव आयोग की कार्रवाई पूरी तरह से संवैधानिक है।
वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता नलिन कोहली ने कहा कि चुनाव आयोग का काम मतदाता सूची को सही और अपडेट करने का है। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र का आधार है और चुनाव आयोग इस जिम्मेदारी को निभा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस फैसले के बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल अब चुनाव आयोग पर हमला करना बंद कर देंगे।
अब भाजपा तय करेगी कौन वोट देगा कौन नहीं- योगेंद्र यादव
वहीं, दूसरी तरफ, सामाजिक कार्यकर्ता और चुनाव विश्लेषक योगेंद्र यादव ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब देश में यह तय करने का अधिकार भाजपा के हाथ में चला गया है कि कौन वोट देगा और कौन नहीं। उन्होंने कहा कि इस फैसले से लोकतंत्र का आधार कमजोर हो रहा है।
टीएमसी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया सम्मान
टीएमसी ने भी इस फैसले का सम्मान किया है। सांसद सौगत रॉय ने कहा कि उनकी पार्टी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करती है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया सही तरीके से नहीं हुई थी, जिसके कारण 27 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए थे। उन्होंने कहा कि टीएमसी इस मुद्दे को उठाती रहेगी और प्रक्रिया में हो रही अनियमितताओं का विरोध करेगी।
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