भारत में Petrol Diesel Price Hike ने आम उपभोक्ता और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर दबाव बढ़ा दिया है। पिछले 11 दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम में कुल 7.5 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी देखी गई है। यह वृद्धि में 2026 के दूसरे पखवाड़े में लगातार चार लेवल पर देखने को मिली है। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू राजनीतिक तनाव को इसका प्रमुख कारण बताया जा रहा है।

लगातार चौथे लेवल में बढ़ीं ईंधन की कीमतें
सरकारी तेल कंपनियों ने 25 मई को पेट्रोल और डीजल के दाम फिर बढ़ा दिएहैं। हालांकि इससे पहले 15 मई ,19 मई और 23 मई को भी तेल की कीमत में बदलाव किया गया था। स्टॉक एक्सचेंज डाटा और ऑयल मार्केट के अनुसार इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेड क्रूड की कीमतों में तेज उछाल होने के बाद कंपनियों की लागत पर दबाव देखने को मिला है। दिल्ली में पेट्रोल 102 रुपए प्रति लीटर के ऊपर हो गया है जबकि डीजल करीब 95 रुपए प्रति लीटर हो चुका है। मुंबई हैदराबाद और तिरुवनंतपुरम जैसे बड़े शहरों में भी कीमत इससे ज्यादाही है।
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किन कारणों से बढ़ा है Petrol Diesel Price Hike?
बाजार विश्लेषकों के अनुसार ईरान और हार्मोज जल डमरू मध्य के आसपास बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल की सप्लाई को प्रभावित कर दिया है। भारत अपनी तेल की जरूरत का सबसे बड़ा हिस्सा आयात करता है इसलिए इंटरनेशनल मार्केट में कीमतों में बदलाव का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता दिख रहा है। इसके अलावा रुपए में कमजोरी और शिपिंग लागत पढ़ने से तेल की कंपनियों का आयात खर्च बढ़ाहै। कंपनी के ऑफिशियल बयान में बताया गया है की लागत दबाव को संतुलित करने के लिए खुदरा कीमतों में बदलाव जरूरी हो गया है।
अलग-अलग राज्यों में क्यों अलग हैं तेल की कीमतें?
Petrol Diesel Price Hike का असर सभी राज्यों में समान नहीं देखा गया है। इसकी बड़ी वजह राज्य के द्वारा लगाए जाने वाला VAT को बताया गया है। महाराष्ट्र तेलंगाना और केरल जैसे बड़े राज्यों में ज्यादा टैक्स होने के कारण पेट्रोल की कीमत 110 रुपए प्रति लीटर की पार हो चुकी है। वहीं अन्य राज्य जैसे दिल्ली गुजरात और उत्तर प्रदेश शादी में अपेक्षाकृत टैक्स कम होने से कीमतें कुछ कम बनी हुई है। चित्र और राज्य सरकार की टैक्स नीति अंतिम कीमत तय करने में जरूरी भूमिका निभाती है।
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आम लोगों और बिजनेस पर असर
ईंधन महंगा होने से लॉजिस्टिक और ट्रांसपोर्ट दोनों की लागत बढ़ने की आशंका है। हालांकि इसका असर एफएमसीजी, कृषि प्रोडक्ट ई-कॉमर्स डिलीवरी और पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर देखने को मिलेगा। बाजार विश्लेषकों के अनुसार अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ज्यादा बनी रहती है तो आने वाले महीना में महंगाई दर का दबाव बढ़ सकता है। हालांकि बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकार टैक्स कटौती या फिर अन्य राहत के उपाय पर अब विचार कर सकती है ताकि उपभोक्ताओं का बोझ कम हो फिलहाल बाजार की नजर वैश्विक क्रूड ऑयल और सरकार की अगली नीति पर है।




