Pakistani Actress Zeeba Bakhtiar : फिल्म”हिना”से हकीकत तक जानें-ज़ेबा बख्तियार की शोहरत के पीछे संघर्ष की कहानी-एक दौर था जब ज़ैबा बख़्तियार का नाम सुनते ही लोगों की आंखों में राज कपूर की फिल्म ‘हिना’ की मासूम, खूबसूरत और सादगी से भरी छवि उभर आती थी। सीमाओं के आर-पार दिलों को जोड़ने वाली इस फिल्म ने ज़ैबा को रातों-रात स्टार बना दिया। लेकिन परदे पर दिखाई देने वाली यह चमक-दमक उनकी असली ज़िंदगी की पूरी सच्चाई नहीं थी। शोहरत के पीछे छुपा था संघर्ष, टूटते रिश्ते, निजी जीवन की उथल-पुथल और फिर खुद को दोबारा संवारने का हौसला। ज़ैबा बख़्तियार की कहानी सिर्फ़ एक अभिनेत्री की नहीं, बल्कि एक ऐसी महिला की है जिसने हर मुश्किल के बाद खुद को फिर से खड़ा किया।ज़ैबा बख़्तियार की ज़िंदगी सिर्फ़ फिल्म ‘हिना’ की मासूमियत नहीं, बल्कि संघर्ष, रिश्तों के उतार-चढ़ाव और आत्मनिर्भरता की मिसाल है। जानिए उनके करियर, निजी जीवन और आज की पहचान।
जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि
ज़ैबा बख़्तियार का जन्म 5 नवंबर 1962 को क्वेटा, पाकिस्तान में हुआ,उनके पिता याहया बख़्तियार पाकिस्तान के पूर्व अटॉर्नी जनरल थे। जबकि उनकी मां ब्रिटिश मूल की थीं, जिससे ज़ैबा को एक बहु-सांस्कृतिक परिवेश मिला,यही वजह रही कि उनकी पर्सनैलिटी में पूर्व और पश्चिम का अनोखा संतुलन दिखाई देता है।
करियर की शुरुआत-छोटे पर्दे से बड़े सपनों तक
ज़ैबा ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत पाकिस्तानी टेलीविज़न से की। टीवी ड्रामा “अनारकली” में उनके अभिनय को खूब सराहना मिली और यहीं से वह पहचान में आने लगीं।
बॉलीवुड में धमाकेदार एंट्री-“हिना”
साल 1991 में राज कपूर की आख़िरी फिल्म “हिना” ने ज़ैबा बख़्तियार को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। इसमें ऋषि कपूर के साथ उनकी जोड़ी दर्शकों को बेहद पसंद आई। यह फिल्म भारत-पाक रिश्तों के बीच इंसानियत और प्रेम की कहानी थी और ज़ैबा की मासूमियत इसकी आत्मा बन गई।

आगे का फ़िल्मी सफ़र
“हिना” की ऐतिहासिक सफलता के बाद ज़ैबा ने कई फिल्मों में काम किया, जैसे-लॉलीवुड की फिल्म-सरगम (1995),
बॉलीवुड की स्टंटमैन और जय विक्रांता हालांकि उन्हें दोनों ही फिल्मों में “हिना” जैसी बड़ी सफलता दोबारा नहीं मिल पाई, लेकिन लॉलीवुड की फिल्म “सरगम” के लिए उन्हें निगार अवॉर्ड जो मशहूर व सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री की यद् में दिया जाता है ये ज़रूर मिला।
निर्देशन और निर्माण
ज़ैबा सिर्फ़ अभिनेत्री ही नहीं रहीं बल्कि उन्होंने फिल्म “बाबू” का निर्माण और निर्देशन भी किया जो उनके आत्मनिर्भर और रचनात्मक व्यक्तित्व को दर्शाता है।
निजी जीवन-रिश्ते और उथल-पुथल से अनुभव और सीख
ज़ैबा बख़्तियार का निजी जीवन हमेशा न सिर्फ चर्चाओं में रहा बल्कि उसमें खासी उथल-पुथल रही। उन्होंने अपने जीवन में कई बार शादियां कीं जिसमें उनकी पहली शादी-सलमान वालियानी से हुई जो बहुत दिनों तक नहीं टिकी। उन्होंने दूसरी शादी अभिनेता जावेद जाफरी से की और उनकी आखिरी शादी मशहूर गायक अदनान सामी से हुई। हालांकि उनके जीवन में कोई भी रिश्ता स्थायी साबित नहीं हुआ तीन-तीन शादियां करने के बावजूद उन्हें दाम्पत्य सुख नहीं मिला लेकिन अदनान सामी से उन्हें एक बेटा हुआ,अज़ान सामी खान, जो आज एक सफल सिंगर, कंपोज़र और म्यूज़िशियन हैं।
संघर्ष के बाद भी जैबा ने नहीं खोया जीवन में संतुलन
इन तमाम उतार-चढ़ावों के बावजूद ज़ैबा बख़्तियार ने खुद को टूटने नहीं दिया। आज वह एक शांत, सुलझी हुई, आत्मनिर्भर और गरिमामय महिला के रूप में जानी जाती हैं जो लाइमलाइट से दूर रहकर भी अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं।
जैबा की अपनी ज़िंदगी से मिलने वाली सीख
ज़ैबा बख़्तियार की कहानी हमें सिखाती है कि-शोहरत हमेशा स्थायी नहीं होती,रिश्तों की असफलता जीवन की असफलता नहीं होती,सबसे ज़रूरी है खुद के साथ ईमानदार रहना और हर गिरावट के बाद उसी खूबसूरती और दम – ख़म फिर उठ खड़े होने का साहस ज़ेबा ने अपनी ही ज़िंदगी से मिले अनुभवों से संभाली होगी।
निष्कर्ष (Conclusion)-ज़ैबा बख़्तियार सिर्फ़ “हिना” की मासूम लड़की नहीं रहीं, बल्कि वह एक ऐसी महिला हैं जिन्होंने शोहरत, दर्द, अकेलेपन और आत्मनिर्भरता-सब कुछ करीब से देखा। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि असल खूबसूरती चेहरे में नहीं, बल्कि संघर्ष के बाद भी मुस्कुराने की ताकत में होती है।
