बुंदेलखंड। मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र की प्राचीन शस्त्र कला ‘अखाड़ा’ को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले पद्मश्री (2026) से सम्मानित अखाड़ा गुरु भगवानदास रैकवार ‘दाऊ’ का निधन हो गया। 83 वर्षीय भगवानदास रायकवार ‘दाऊ’ ने भोपाल एम्स में शनिवार की रात अंतिम सांसे ले लिए है। बेटे ने निधन की पुष्टि की है।
16 साल में अपनाया अखाड़ा, छोड़ दिए थें बैक की नौकरी
भगवानदास रैकवार ने महज 16 साल की उम्र से अखाड़ा सीखना शुरू कर दिया था। वे सागर में एक सरकारी बैंक में नौकरी करते थे। अखाड़ा को पूरा समय देने के लिए उन्होंने 1998 में बैंक की नौकरी से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन अखाड़ा कला को समर्पित कर दिया।
इस साल मिला था पद्मश्री पुरस्कार
अखाड़ा गुरू को भारत सरकार ने जनवरी 2026 में पद्मश्री पुरस्कार देने की घोषणा की थी। यह सम्मान उन्हें भारतीय पारंपरिक मार्शल आर्ट के संरक्षण, संवर्धन और प्रशिक्षण में अमूल्य योगदान के लिए दिया गया। भगवानदास रैकवार ने देशभर में घूमकर बेटियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया और उन्हें सशक्त बनाया। उन्होंने रूस, हिमाचल प्रदेश, हैदराबाद, जयपुर, लखनऊ, नागपुर और मुंबई सहित कई स्थानों पर प्रशिक्षण शिविर लगाए थे।
सीएम, डिप्टी सीएम आदि राजनेताओं ने जताया शोक
अखाड़ा गुरू के निधन से पूरे बुदेलखंड में शोक की लहर है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल, राज्यमंत्री लखन पटेल और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह ने अखाड़ा गुरू के निधन पर गहरा शोक जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दिए है।




