मध्यप्रदेश में नजर आऐगे एक सींग वाले गैंडे और दरियाई घोड़ा, ऐसी है इन वन्य जीवों की खूबियां

इंदौर। वन्य जीवों से समृद्ध हो रहे मध्यप्रदेश में जल्द ही एक और उपलब्धी मिलने वाली है। इंदौर के कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय (इंदौर जू) में एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत एक सींग वाले गैंडे का जोड़ा और कानपुर से 700 किलोमीटर की दूरी तय कर दरियाई घोड़ा (हिप्पो) सतीश लाया जाएगा। यह ऐतिहासिक पहल इंदौर को मध्य प्रदेश का पहला ऐसा चिड़ियाघर बनाएगी जहां एक सींग वाले गैंडे देखने को मिलेंगे।

एक सींग वाले गैंडे

इंदौर का जू मध्य प्रदेश का पहला ऐसा प्राणी संग्रहालय बनने जा रहा है, जहां गैंडों का जोड़ा पहुंचेगा। इनके लिए प्राकृतिक आवास (घास के मैदान, उथले पानी के कुंड और कीचड़ वाले क्षेत्र) तैयार किए जा रहे हैं। एक सींग वाला गैंडा (भारतीय गैंडा) एशिया में पाए जाने वाले स्तनधारियों में सबसे बड़े जीवों में से एक है। इसकी मुख्य पहचान इसकी मोटी भूरे-धूसर रंग की त्वचा, शरीर पर मौजूद प्राकृतिक कवच जैसी सिलवटें और नाक पर स्थित एक अकेला काला सींग है। यह मुख्य रूप से भारत के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान जैसे असम, पश्चिम बंगाल और नेपाल के तराई क्षेत्रों में पाया जाता है।

शारीरिक बनावट और रूपएकल सींग

इसके सिर या नाक पर 20 से 60 सेमी तक लंबा केवल एक काला सींग होता है। मोटी धूसर त्वचा पर गहरी सिलवटें होती हैं जो इसे एक सैनिक के कवच जैसा रूप देती हैं। एक वयस्क नर गैंडे का वजन 1,800 से 2,700 किलोग्राम तक हो सकता है। यह पूरी तरह शाकाहारी है। इसका मुख्य आहार घास, जलीय पौधे, फल और झाड़ियाँ हैं। तेज धूप से बचने और शरीर को ठंडा रखने के लिए यह घंटों पानी या कीचड़ में डूबा रहता है। भारी-भरकम शरीर होने के बावजूद यह खतरे के समय लगभग 55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकता है। इसकी तीव्र इंद्रियाँ होती है। इसकी देखने की क्षमता भले ही कम हो, लेकिन सुनने और सूंघने की शक्ति बहुत तेज होती है।

दरियाई घोड़ा सतीश

कानपुर चिड़ियाघर से लगभग 700 किमी दूर स्थित इंदौर आ रहे हिप्पो सतीश की यात्रा बेहद खास होगी। सफर के दौरान उसके शरीर को नम रखने के लिए लगातार पानी का छिड़काव किया जाएगा, जिसमें लगभग 20,000 लीटर पानी खर्च होगा।
दरियाई घोड़ा (हिप्पो) अफ्रीका का एक विशालकाय और गोलमटोल अर्ध-जलीय स्तनधारी जानवर है। इसका वजन 1500 से 3200 किलोग्राम तक होता है।

हाथी और गैंडे के बाद यह धरती पर रहने वाला तीसरा सबसे बड़ा शाकाहारी जीव है, जिसके छोटे पैर, बड़ा सिर और भारी शरीर होता है। इसका रंग भूरे-गुलाबी जैसा होता है। इसकी त्वचा बहुत मोटी होती है और पसीने की जगह लाल रंग का द्रव निकलता है जो इसे धूप से बचाता है। इसे तैरना नहीं आता, लेकिन यह अपना अधिकांश समय नदियों या झीलों के पानी में ही बिताता है। पानी के अंदर यह पैर से जमीन को धक्का देकर चलता है। इसकी आंखें, नाक और कान सिर के ऊपरी हिस्से पर होते हैं ताकि पानी में आधा डूबे रहने पर भी यह देख-सुन सके। यह पूरी तरह शाकाहारी है और रात के समय पानी से बाहर आकर भारी मात्रा में घास चरता है। दिखने में शांत लगने वाला यह जानवर बहुत आक्रामक और खतरनाक होता है। इसके बड़े और नुकीले दांत होते हैं, और यह खतरे का अहसास होने पर किसी भी जीव पर हमला कर सकता है।

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