NSE IPO: ₹30,000 करोड़ के पब्लिक इश्यू के साथ बना भारत का सबसे बड़ा IPO..

NSE IPO: Poised to become India's largest IPO with a ₹30,000 crore public issue.

देश का प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज करीब 30000 करोड रुपए के प्रस्तावित NSE IPO के लिए ड्राफ्ट दस्तावेज दाखिल कर चुका है। सालों के नियम में देरी के बाद उठाया गया ये कदम भारत के पूंजी बाजार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर सभी आवश्यक मांग समय पर मिल जाती है तो यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बन सकता है। इसका आंसर कुंजी बाजार इंस्टीट्यूशन निवेशक और संभावित निवेशकों पर देखने को मिलता है।

NSE IPO: Poised to become India's largest IPO with a ₹30,000 crore public issue.

NSE IPO क्यों होता है खास?

होने वाले प्रस्तावित NSE IPO का आकार लगभग 30000 करोड़ है। जो इसे भारतीय शेयर बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ बन सकती है। इस यीशु को पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल के रूप में लाया गया है। यानी कंपनी कोई नई शेयर जारी नहीं करेगी बल्कि अपने मौजूदा शेयरधारक को अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचेगी। इससे प्राप्त राशि कंपनी के बजाय शेयर बेचने वाले निवेशकों को मिलेगी।

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किन निवेशकों की हिस्सेदारी इसमें होगी शामिल?

प्राप्त जानकारी के अनुसार इसमें ऑफर फॉर सेल में कई प्रमुख संस्थागत निवेशक अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेच सकते हैं। इन में State Bank of India, Bank of Baroda, Canada pension plan investment board,Temasek और द न्यू इंडिया एश्योरेंस जैसे बड़े निवेशक कंपनी के नाम शामिल है। वहीं कुछ प्रमुख शेयेरधारक इस चरण में अपने हिस्सेदारी बनाए रखने का फैसला लिया है।

लगभग एक दशक बाद आगे बढ़ी लिस्टिंग

NSE IPO ने पहली बार 2016 में लिस्टिंग की प्लानिंग की थी। लेकिन नियम की जांच और विभिन्न मंजूरियों में देरी होने के कारण या प्रक्रिया लंबे समय तक अटकी रही। अब जरूरी प्रक्रिया में प्रगति होने के बाद कंपनी ने फिर से आईपीओ की दिशा में कदम बढ़ाया है। कंपनी के आधिकारिक डॉक्यूमेंट के अनुसार नियम के अनुसार मंजूरी मिलने के बाद ही अंतिम मूल्य इशू खुलने की तारीख और अन्य विवरण घोषित होंगे।

निवेशकों और बाजार पर क्या है संभावित असर

NSE IPO हमारे भारतीय पूंजी बाजार के लिए एक ऐतिहासिक मिल साबित हो सकता है इससे निवेश करने वाले लोगों को देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज में हिस्सेदारी लेने का ऑप्शन मिलेगा। हालांकि किसी भी आईपीओ में निवेश करने का फैसला कंपनी के फाइनेंशियल प्रदर्शन उसके मूल्यांकन और रिस्क के आकलन के बाद ही लेना चाहिए। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि आईपीओ का अंतिम आकार और समय नियम स्वीकृति पर निर्भर करेगा।

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क्या है आगे आउटलुक?

स्टॉक एक्सचेंज डाटा और उपलब्ध डॉक्यूमेंट के अनुसार अब बाजार की नजर भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड की समीक्षा पर रहने वाली है। मंजूरी मिलने के बाद कंपनी प्राइस बैंड एंकर निवेशक की भागीदारी और यीशु की समय सीमा की घोषणा करने वाली है।

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