नीट आंदोलन के छात्रों पर दर्ज नही होगे अपराध, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किया जबाब

नईदिल्ली। नीट पेपर लीक मामले को लेकर किए गए आंदोलन के दौरान जिस तरह से बर्बारता की गई उस पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से अपना जबाब प्रस्तुत किया गया है। जिसमें कहा गया है कि नीट परीक्षा को लेकर जंतर-मंतर दिल्ली आंदोलन में शामिल छात्रों पर एफआईआर दर्ज नही की जाएगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार की ओर से कोर्ट का बताया कि सरकार अपने वादे पर कायम है। तो वही सॉलिसिटर जनरल ने यह भी स्पष्ट किया है कि आंदोलन के दौरान गंभीर अपराधों को लेकर 2700 से ज्यादा लोगो पर जो एफआईआर दर्ज की गई है उसे वापस नही लिया जाएगा।

बर्बारता की शिकायत पर की गई सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को उस याचिका पर सुनवाई की गई, जिसमें आरोप लगाया गया है कि आंदोलन के दौरान बर्बाता की गई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दिल्ली एवं अन्य राज्यों की सरकारें छात्रों पर दर्ज एफआईआर को वापस ले सकती है, बर्शते उन पर कोई अपराध पहले से दर्ज न हों। इतना ही नही कोर्ट ने कहा कि बेहद सख्ती करने वाले जवानों को न बचाएं।

20 जुलाई को हुआ था आंदोलन

ज्ञात हो कि कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले हजारों की सख्या में आदोलन पर उतरे लोगो ने दिल्ली के जंतर-मंतर में आंदोलन करके अपनी 3 मांगें सरकार से रखी थी। आंदोलन कारियों की मांगों को सरकार ने मान लिया, इसमें एक मांग यह भी रही है कि छात्रों पर कोई कानूनी कार्रवाई नही की जाए और उन पर दर्ज मुकदमें को वापस लिया जाए।

मामले पर अब 18 अगस्त को होगी सुनवाई

सरकार की ओर से प्रस्तुत किए गए जबाब के बाद कोर्ट ने जंहा सरकार पर जबाबदेही तय की है वही इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 अगस्त की तरीख तय किया है। ज्ञात हो कि नीट पेपर लीक मामले को लेकर खास तौर से देश की युवा तरूड़ाई ने दिल्ली के जंतर-मतर में न सिर्फ आंदोलन किया बल्कि इसका असर देश के अन्य राज्यों पर भी देखा गया था, किस तरह से युवा सरकार से अपने मांगों को मनवाने के लिए सड़क पर उतरे और पुलिस इस आंदोलन को रोकने के लिए पूरी सख्ती के साथ लगी रही, इसके बाद भी आंदोलन नही रूका। आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का 25 जुलाई को इस्तीफे और जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग मान लेने के साथ ही आंदोलन खत्म हुआ था।

सुप्रीम कोर्ट और सरकार का रुख

  • सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार बिना आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ मामले आगे न बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
  • अदालत ने स्पष्ट किया कि दिल्ली और अन्य राज्य सरकारें ऐसे छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को बंद या वापस ले सकती हैं।
  • 18 वर्ष से कम आयु के हिरासत में लिए गए नाबालिग छात्रों को तुरंत रिहा करने के निर्देश दिए गए हैं।

आपराधिक रिकॉर्ड वालों पर सख्ती जारी

  • यह राहत केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले और बेदाग छात्रों के लिए है।
  • गंभीर, जघन्य अपराधों या हिंसा में शामिल आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को इस सुरक्षा का लाभ नहीं मिलेगा और उनके खिलाफ जांच जारी रहेगी।
  • दिल्ली, बिहार, असम और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्य सरकारों ने भी इस संबंध में आदेश जारी कर प्रदर्शन से जुड़े मामलों की समीक्षा और वापसी की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

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