रीवा। प्रदेश सरकार द्वारा भारतीय स्टाम्प (मध्य प्रदेश संशोधन) विधेयक के तहत राज्य में विभिन्न प्रकार के विलेखों और दस्तावेजों पर मुद्रांक शुल्क (स्टाम्प ड्यूटी) की नवीनतम दरें पूरी तरह प्रभावी कर दी गई हैं। इस संबंध में कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने आदेश जारी कर दिया है। जिसमें सभी संबंधित विभागों और लोक सेवा केंद्रों को इन दरों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर आदेश के अनुसार मध्यप्रदेश राजपत्र में प्रकाशित संशोधन के तहत भारतीय स्टाम्प अधिनियम 1899 की अनुसूची-1(क) के अंतर्गत आने वाले विभिन्न दस्तावेजों पर अब नए प्रभार लागू हो चुके हैं।
देना होगा अब इतना शुल्क
इस नए आदेश में निर्धारित शुल्क के तहत अब सामान्य शपथ पत्र के लिए 200 रुपये का शुल्क देय होगा। इसी तरह बिना कब्जा वाले अनुबंध पत्र, सहमति पत्र, संशोधन पत्र, बंधकित संपत्ति के प्रतिहस्तांतरण और न्यास के प्रतिसंहरण जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों के लिए अब 5000-5000 हजार रुपये का स्टाम्प शुल्क निर्धारित किया गया है। इसके अलावा वर्क कॉन्ट्रैक्ट (करार या करार का ज्ञापन) के मामलों में व्यवस्था को दो भागों में बांटा गया है, जिसमें पचास लाख रुपये तक के संविदा मूल्य पर एक हजार रुपये का शुल्क लगेगा। वहीं यदि संविदा मूल्य पचास लाख रुपये से अधिक है, तो दस लाख की अधिकतम सीमा के अधीन रहते हुए कुल संविदा मूल्य का शून्य दशमलव दो प्रतिशत शुल्क चुकाना होगा।
गौण खनिज पट्टों के दस्तावेजों पर अब पट्टे के अधीन देय या परिदेय पूरी रकम का दो प्रतिशत शुल्क तय किया गया है। पार्टनरशिप डीड के मामलों में, जहाँ भागीदारी में कोई अभिदाय का शेयर नहीं है या जहाँ ऐसे अभिदाय के शेयर का मूल्य पचास हजार रुपये से अधिक नहीं है, और साथ ही पार्टनरशिप डीड में जहाँ भागीदारी में शेयर राशि 50 हजार रुपए से अधिक न हो वहाँ पाँच हजार रुपए तथा पार्टनरशिप डीड में अचल संपत्ति शेयर के रूप में न हो वहाँ भी पांच हजार रुपये का शुल्क देय होगा। विभिन्न प्रकार के पावर ऑफ अटार्नी, मुख्तयारनामा और पट्टे के अभ्यर्पण से जुड़े दस्तावेजों के लिए दो हजार रुपये से लेकर पांच हजार रुपये तक की दरें तय की गई हैं।




