नेपाल की नई सरकार ने भारत समेत 6 देशों से अपने राजदूतों को वापस बुलाने का बड़ा फैसला लिया है। जानिए Nepal recalls ambassadors के इस फैसले का कूटनीतिक असर।

Nepal Prime Minister KP Sharma Oli chairing cabinet meeting for diplomatic decisions.

पड़ोसी देश नेपाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा कूटनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली नई गठबंधन सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए भारत सहित छह प्रमुख देशों से अपने राजदूतों को वापस बुलाने का निर्णय लिया है। Nepal recalls ambassadors के इस कदम के बाद अब इन देशों में तैनात राजदूतों के पास स्वदेश लौटने के लिए केवल एक महीने का समय बचा है। यह फैसला नेपाल की बदलती घरेलू राजनीति और विदेश नीति के नए समीकरणों की ओर इशारा करता है।

कैबिनेट की बैठक में लिया गया फैसला

काठमांडू में आयोजित मंत्रिपरिषद की हालिया बैठक में सरकार ने उन राजदूतों को वापस बुलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिनकी नियुक्ति पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान राजनीतिक कोटे के तहत की गई थी। सरकारी प्रवक्ता और सूचना मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय प्रशासन में गतिशीलता लाने के उद्देश्य से लिया गया है।

वापस बुलाए गए राजदूतों में भारत के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, कतर, सऊदी अरब और दक्षिण कोरिया में तैनात प्रतिनिधि शामिल हैं। जानकारों का मानना है कि नई सरकार अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार नई नियुक्तियां करना चाहती है, ताकि अंतरराष्ट्रीय मंच पर नेपाल के हितों को बेहतर ढंग से रखा जा सके।

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Nepal recalls ambassadors: भारत के साथ संबंधों पर असर

नेपाल और भारत के बीच कूटनीतिक संबंध हमेशा से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण रहे हैं। ऐसे में भारत से राजदूत शंकर शर्मा को वापस बुलाया जाना चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि यह एक सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है जब भी नेपाल में सत्ता परिवर्तन होता है।

अक्सर देखा गया है कि नई गठबंधन सरकारें अपने विश्वासपात्र लोगों को महत्वपूर्ण वैश्विक राजधानियों में भेजना चाहती हैं। नई दिल्ली में तैनात राजदूत की वापसी के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ओली सरकार भारत में किसे अपना नया प्रतिनिधि नियुक्त करती है।

30 दिनों की समय सीमा और प्रक्रिया

नेपाल के विदेश मंत्रालय ने संबंधित दूतावासों को आधिकारिक निर्देश भेज दिए हैं। वापस बुलाए गए सभी छह राजदूतों को अपना कार्यकाल समेटने और काठमांडू लौटने के लिए 30 दिन की मोहलत दी गई है। इस अवधि के दौरान वे अपने चल रहे प्रोजेक्ट्स और कूटनीतिक कार्यों का हैंडओवर पूरा करेंगे।

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यह पहली बार नहीं है जब नेपाल ने इस तरह का सामूहिक निर्णय लिया है। इससे पहले भी शेर बहादुर देउबा और पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ की सरकारों के दौरान राजनीतिक नियुक्तियों को रद्द करने की परंपरा रही है। हालांकि, इतनी जल्दी और प्रमुख देशों को एक साथ प्रभावित करने वाला यह फैसला कूटनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर चुका है।

नेपाल की नई विदेश नीति की दिशा

केपी शर्मा ओली के प्रधानमंत्री बनने के बाद नेपाल की विदेश नीति में ‘बैलेंसिंग एक्ट’ की उम्मीद की जा रही है। एक तरफ जहां भारत और अमेरिका के साथ संबंधों को स्थिरता देने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर चीन के साथ बढ़ते आर्थिक सहयोग को भी साधना है।

Nepal Prime Minister KP Sharma Oli chairing cabinet meeting for diplomatic decisions.
Nepal Diplomatic Recall Order 2026

राजदूतों को वापस बुलाने के इस कदम को प्रशासन पर पकड़ मजबूत करने के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार चाहती है कि महत्वपूर्ण देशों में ऐसे प्रतिनिधि हों जो वर्तमान सत्ता पक्ष के विजन के साथ तालमेल बिठा सकें।

भविष्य की नियुक्तियों पर नजर

सूत्रों के अनुसार, नेपाल सरकार जल्द ही नए नामों की घोषणा कर सकती है। उम्मीद है कि इस बार करियर डिप्लोमेट्स (पेशेवर राजनयिकों) और राजनीतिक विशेषज्ञों का मिश्रण देखने को मिलेगा। सरकार पर इस बात का दबाव भी है कि वे उन देशों में जल्द नियुक्ति करें जहाँ बड़ी संख्या में नेपाली प्रवासी श्रमिक रहते हैं, जैसे कतर और सऊदी अरब।

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