Neem Karoli baba को आज भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी उनके भक्त एक महान संत और हनुमान भक्त के रूप में याद करते हैं। उत्तराखंड का कैंची धाम आज भी उनके नाम से जुड़े प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों के लिए पहचाना जाता है उनके जीवन से जुड़ी कई ऐसी घटनाएं हैं जिन्हें भक्त आज एक चमत्कार के तौर पर याद करते हैं। इनमें कुछ घटनाएं उनके भक्तों और शिष्यों के यादगार लम्हों में दर्ज है तो चलिए हम जानते हैं ऐसी पांच घटनाओं के बारे में।

अपने आप ट्रेन के रुक जाने का किस्सा
Neem karoli baba की सबसे फेमस कहानी उसे समय की है जब बाबा बिना टिकट ट्रेन के फर्स्ट क्लास डिब्बे में बैठे थे। ऐसा बताया जाता है कि उनके पास टिकट न होने के कारण उन्हें नीम करोली के पास ट्रेन से उतार दिया गया था इसके बाद ट्रेन आगे ही नहीं बढ़ी। काफी कोशिश करने के बाद भी जब ट्रेन नहीं चली तो स्थानीय अधिकारियों ने बाबा को दोबारा ट्रेन में बैठने के लिए मनाया। आश्रम से जुड़े यादगार लंबू के अनुसार बाबा के ट्रेन में बैठने के बाद ट्रेन चल पड़ी इसी घटना को उनके नाम नीम करोली बाबा से जुड़ी लोकप्रिय कथाओं में जाना जाता है।
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पहली मुलाकात में राम दास की मां से जुड़ी हुई बात
अमेरिकी मनोवैज्ञानिक रिचर्ड अल्बर्ट जो कि बाद में रामदास के नाम से प्रसिद्ध हुए, 1967 के समय में भारत यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात नीम करोली बाबा से हुई थी। रामदास के अपने स्मरण जानकारी के अनुसार उनकी पहली मुलाकात में बाबा ने उन्हें उनकी मां के बारे में एक ऐसी बात कही जिन्हें सुनकर वह बिल्कुल स्तब्ध रह गए थे। बाबा ने उनकी मां की मृत्यु और उनकी बीमारी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी के बारे में जिक्र किया रामदास ने इस अनुभव को अपने लिए बेहद असाधारण बताया।
आंखों से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला
एक यादगार जानकारी के अनुसार बाबा ने मद्रास में एक खास डॉक्टर को अपने भक्त के बेटे को दिखाने की इच्छा बताई, बाद में उनके भक्त के बेटे की आंखों की जांच उसी डॉक्टर ने की और उसकी कार्निया में गंभीर दिक्कतें देखी। जानकारी में बताया गया है कि समय पर इलाज होने से उनकी आंख बच गई भक्तों ने इस पूरी घटना को बाबा की जानकारी और उनकी लीला से जोड़कर देखा।
छाते को बताया था ‘सुरक्षा का साधन’
आर पी वैष नाम के एक भक्त से जुड़ा या मामला काफी चर्चा में देखने को मिलता है। जिसने बताया जाता है कि बाबा ने उन्हें छाता देते हुए उसे अपने पास रखने के लिए कहा था। कई साल बाद जब वैष को स्वास्थ्य संबंधित गंभीर समस्याएं हुई, तो उन्हें इलाज के दौरान उनकी पत्नी उनकी पत्नी वह छाता भी अस्पताल लेकर गई। बाद में जांच में उनकी बड़ी हुई तिल्ली (spline)के आकार में अचानक कमी देखने को मिली। तब लोगों ने से बाबा का उपकार और कृपा समझकर बाबा की महिमा माना। ध्यान दे तिल्ली का तात्पर्य शरीर के ऊपर बाएं हिस्से में पेट का एक अंग है, यह शरीर में इम्यून सिस्टम से जुड़े काम करने में मदद करता है।
पानी से दूध बनने की कहानी भी
दरअसल्या मामला 1966 के कुंभ मेले से जुड़ा हुआ बताया जाता है जो बाबा की फेमस किस्सो में सेएक है। रामदास की वेबसाइट पर प्रकाशित होने वाले दादा मुखर्जी के कथन अनुसार बाबा ने अपने एक भक्त से लोटे में गंगा का पानी भरने को कहा। कुछ समय बाद जब लोटे से पानी मांगा गया तो उसमें पानी की जगह दूध दिखाई देने की बात कही गई। बाबा ने उसे दूध को घर ले जाने से मना कर दिया और लौटा धोने को कहा भक्तों ने इस घटना को बाबा की अध्यात्म की शक्ति से जोड़ कर देखा और इसे भी बाबा की महिमा समझा।
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चमत्कार है या आस्था की घटनाएं?
इन सभी घटनाओं को लेकर यह समझना जरूरी है कि यह मुख्य रूप से भक्तों की स्मरण मौखिक परंपरा और आध्यात्मिक की पुस्तकों में दर्ज कथाएं हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित चमत्कार की तरह कहना सही नहीं होगा। फिर भी इन कथाओं ने बाबा के आध्यात्मिक छवि और उनके प्रति भक्तों की आस्था को मजबूत करने में अपनी एक बड़ी भूमिका निभाई है शायद आज भी यही कारण है कि दशकों बाद भी लोग neem karoli baba के जुड़े कथाओं में दिलचस्पी रखते हैं।




