NASA का आर्टेमिस-2 मिशन लॉन्च! 1972 के बाद फिर चांद के करीब इंसान

NASA Moon Mission Launch: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने 2 अप्रैल को ऐतिहासिक आर्टेमिस-2 मिशन लॉन्च (Artemis II Moon Mission) किया। फ्लोरिडा के Kennedy Space Center से सुबह 4:05 बजे स्पेस लॉन्च सिस्टम (Space Launch System Rocket) के जरिए 4 अंतरिक्ष यात्रियों को चांद की ओर रवाना किया गया।

1972 के बाद पहली मानव चंद्र यात्रा

यह मिशन 1972 के Apollo 17 के बाद पहली बार है, जब इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा से बाहर जाकर चंद्रमा के करीब पहुंचेगा। मानव चंद्र कक्षा मिशन (Human Lunar Orbit Mission) के तहत अंतरिक्ष यात्री चांद का चक्कर लगाकर पृथ्वी पर लौटेंगे।

10 दिन का सफर और खास मिशन

यह मिशन कुल 10 दिनों का होगा, जिसमें क्रू करीब 6,85,000 मील की दूरी तय करेगा। चंद्रमा फ्लाईबाय मिशन (Moon Flyby Mission Distance) के दौरान अंतरिक्ष यात्री चांद के उस हिस्से की तस्वीरें लेंगे, जो अब तक कम देखी गई हैं।

मिशन का मकसद क्या है

Artemis II Mission Objective: इस मिशन का मुख्य उद्देश्य लाइफ सपोर्ट सिस्टम टेस्ट (Spacecraft Life Support System Test) करना है, ताकि अंतरिक्ष में इंसानों के सुरक्षित रहने की क्षमता को जांचा जा सके। यह मिशन भविष्य में चांद पर इंसानों के बसने की तैयारी का अहम कदम है।

4 अंतरिक्ष यात्रियों की टीम (Artemis II Crew Members Details)

इस मिशन में 4 अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं:

  • Reid Wiseman – मिशन कमांडर
  • Christina Koch – मिशन स्पेशलिस्ट
  • Jeremy Hansen – मिशन स्पेशलिस्ट
  • Victor Glover – पायलट

पहली महिला चंद्रमा के करीब (First Woman Near Moon Mission) के रूप में क्रिस्टीना कोच इतिहास रचेंगी, जबकि विक्टर ग्लोवर पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री होंगे जो चांद के करीब पहुंचेंगे।

अगला कदम: चांद पर वापसी

इस मिशन के बाद NASA Artemis Program के तहत अगले मिशनों की तैयारी करेगा। आर्टेमिस-3 चंद्र लैंडिंग (Artemis III Moon Landing Plan) के जरिए भविष्य में इंसान फिर से चांद की सतह पर कदम रख सकता है।

अपोलो और आर्टेमिस में अंतर

अपोलो मिशन का उद्देश्य शीत युद्ध के दौरान स्पेस रेस जीतना था, जबकि आर्टेमिस प्रोग्राम का लक्ष्य चांद पर स्थायी बेस (Permanent Moon Base Plan) बनाना है। यह मिशन भविष्य में मंगल ग्रह तक इंसानों को पहुंचाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है

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