MSP 2026-27: केंद्र सरकार ने 2026-27 के लिए 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य या यानी एसपी में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति की बैठक में या फैसला लिया गया जिसमें नई एमएसपी की दरों का उद्देश्य किसानों को उनके उत्पादन लागत का बेहतर लाभ देना था। तिलहन व दलहन जैसी फसलों के उत्पादन को इसे बढ़ावा मिलता है इसका असर आने वाले खरीफ के सीजन में लाखों किसानों की इनकम और फसल पर पड़ सकता है।

MSP 2026-27 में किन फसलों के दाम बढ़े है?
सरकार द्वारा निर्धारित MSP के तहत इस बार अधिकांश खरीफ फसलों में समर्थन मूल्य में वृद्धि की गई है। धान का दाम 72 रुपए से बढ़कर 2441 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया है। इसके अलावा अरहर का न्यूनतम समर्थन मूल्य 450 रुपए से बढ़कर 8450 रुपए, उड़द दाल का दाम 400 से बढ़कर 8200 रुपए और सोयाबीन का दाम ₹380 से बढ़कर 5708 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गयाहै। तिलहन के फसलों में सबसे बड़ी बढ़ोतरी हुई है। सूरजमुखी के एसपी में 622 प्रति क्विंटल तेल में ₹500 प्रति क्विंटल और नाइजर सी में 515 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि हो गई है। सरकार के मुताबिक इससे देश में खाद्य तेलों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिल पाएगा।
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MSP बढ़ाने के पीछे सरकार की क्या प्लानिंग?
इस बढ़ोतरी का उद्देश्य किसानों को उत्पादन लागत पर काम से कम 50% तक का लाभ देना है। सरकार के द्वारा लगातार फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है ताकि किसान केवल धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों पर ही निर्भर नहीं रहे। तिलहन और दुल्हन की खेती बढ़ने से खाद्य तेल और दालों के आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए भी इससे मदद मिलेगी। बाजार विश्लेषकों के अनुसार इस बार तिलहन और दलहन की फसलों को अपेक्षा अनुसार अधिक प्राथमिकता दी गई है। जिससे इन क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाने की संभावना बनती देखी जा सकती है।
इसका किसानों और कृषि के क्षेत्र पर असर?
नई एसपी की दरों से उनके किसानों को सबसे ज्यादा लाभ मिलने वाला है जिनकी फसलों को सरकार खरीदने वाली है। हालांकि वास्तविक फायदा राज्यों में खरीद की व्यवस्था और मंडी में एसपी के प्रभावी कामों पर निर्भर करेगा। कृषि विशेषज्ञ के मुताबिक अगर खरीद प्रक्रिया मजबूत बनी रहती है तो किसान अधिक लाभ वाली फसलों की तरफ अपना ध्यान दे सकते हैं। इससे कृषि के उत्पादन के संतुलन में भी सुधार आने की संभावना है।
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अब आगे क्या देखना होगा?
कंपनी के ऑफिशियल बयान की तरह सरकार ने भी स्पष्ट बताया कि एसपी किसानों को न्यूनतम मूल्य सुरक्षा देने का एक माध्यम है हालांकि बाजार में वास्तविक कीमत और आपूर्ति के आधार पर निर्धारित होती है। आने वाले खरीफ के सीजन में क्या देखना महत्वपूर्ण होने वाला है कि विभिन्न राज्यों में सरकारी खरीद कितने प्रभावी होती है और कितने किसान नई एमएसपी दलों का लाभ उठा पाते हैं।




