MP Wheat Procurement: सरकारी गोदामों में गेहूं की कमी का मामला सामने आने के बाद मध्य प्रदेश नागरिक आपूर्ति निगम ने भंडारण व्यवस्था की जांच तेज कर दी है। निगम ने खाद्यान्न की पैकिंग में इस्तेमाल किए गए जूट के बोरे और पीपी (Polypropylene) बैग की गुणवत्ता की जांच के आदेश दिए हैं। इसके लिए अलग-अलग जिलों में अधिकारियों की विशेष टीमें तैनात की गई हैं, जो भंडारण और परिवहन के दौरान इस्तेमाल हुई पैकिंग सामग्री की गुणवत्ता की जांच कर रिपोर्ट सौंपेंगी।
MP Wheat Procurement: मध्य प्रदेश के सरकारी गोदामों में गेहूं की कमी का मामला सामने आने के बाद नागरिक आपूर्ति निगम ने खाद्यान्न भंडारण व्यवस्था की गहन जांच शुरू कर दी है। निगम अब गेहूं की पैकिंग में इस्तेमाल किए गए जूट के बोरे और पीपी (Polypropylene) बैग की गुणवत्ता की जांच कराएगा। निगम के अध्यक्ष केपी यादव के निर्देश पर प्रबंध संचालक भास्कर लाक्षाकर ने संबंधित अधिकारियों को जांच के आदेश जारी किए हैं।
86 हजार क्विंटल गेहूं की कमी के बाद उठाया गया कदम
निगम के मुताबिक, सरकारी गोदामों में करीब 86 हजार क्विंटल गेहूं की कमी सामने आने के बाद कई शिकायतें मिली थीं। आरोप था कि खाद्यान्न की पैकिंग में इस्तेमाल किए गए जूट के बोरे और पीपी बैग निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतर रहे थे। इन्हीं शिकायतों की पुष्टि के लिए विशेष जांच टीम गठित की गई है, जो विभिन्न जिलों में भंडारण व्यवस्था की जांच करेगी।
सरकार बोली- भंडारण में कुछ नुकसान सामान्य प्रक्रिया
सरकार का कहना है कि गेहूं की तुलाई, परिवहन और भंडारण के दौरान कुछ मात्रा में कमी आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। पिछले वर्षों में यह औसतन 176 ग्राम प्रति क्विंटल दर्ज की जाती थी, जबकि इस वर्ष यह घटकर 70 ग्राम प्रति क्विंटल रह गई है। खास बात यह है कि इस बार पिछले साल की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत अधिक गेहूं की खरीदी हुई, इसके बावजूद नुकसान का स्तर पहले से कम दर्ज किया गया है।
सागर जिले की भी होगी विशेष जांच
निगम ने सागर जिले में खरीदे गए गेहूं की भी अलग से जांच कराने का फैसला किया है। यहां पहले औसतन 510 ग्राम प्रति क्विंटल गेहूं की कमी दर्ज होती थी, जो इस वर्ष घटकर 318 ग्राम प्रति क्विंटल रह गई है। सरकार का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद यदि किसी स्तर पर लापरवाही या गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदार पक्षों से नुकसान की भरपाई कराई जाएगी।
तीन वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी गई जांच की जिम्मेदारी
जांच की निगरानी महाप्रबंधक (उपार्जन) के नेतृत्व में की जाएगी। अलग-अलग जिलों के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय कर दी गई है।
- एजीएम एस.सी. हेडाऊ को सीहोर, उज्जैन और रतलाम जिलों की जांच सौंपी गई है।
- एजीएम ज्योति चोकसे विदिशा, नर्मदापुरम और देवास जिलों की जांच करेंगी।
- प्रबंधक हेमराज मोरे भोपाल, रायसेन और नरसिंहपुर जिलों में जांच की जिम्मेदारी संभालेंगे।
जांच में किन बिंदुओं पर रहेगा फोकस?
जांच टीम यह पता लगाएगी कि खाद्यान्न की पैकिंग में इस्तेमाल किए गए जूट के बोरे और पीपी बैग निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप थे या नहीं। इसके अलावा यह भी जांच की जाएगी कि कहीं खराब गुणवत्ता वाले बैगों की वजह से भंडारण या परिवहन के दौरान गेहूं को नुकसान तो नहीं पहुंचा। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी और दोषियों के खिलाफ नियमों के अनुसार कदम उठाए जाएंगे।




