भोपाल। राजधानी भोपाल में प्रदेश के पर्यटन को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से दो अत्यंत महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए गए। इनमें एडवेंचर टूरिज्म तथा माइस एवं क्रिएटिव इकोनॉमी विषयों पर आयोजित राउंडटेबल में देश के ख्यातिलब्ध विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं और उद्योग प्रतिनिधियों ने प्रदेश को भविष्य का प्रमुख टूरिज्म हब बनाने की रणनीति पर गहन विचार-विमर्श किए है।
इंदौर और भोपाल में आयोजनों की अपार संभावनाएं
माइस एवं क्रिएटिव इकोनॉमी आर्थिक विकास के वाहक, मध्यप्रदेश की इवेंट इकोनॉमी का निर्माण विषयक राउंडटेबल सत्र में केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के संयुक्त सचिव एवं इंडिया कन्वेंशन प्रमोशन ब्यूरो के चेयरमैन हरिकिशोर एस. ने कहा कि देश में माइस (मीटिंग्स, इंसेंटिव्स, कॉन्फ्रेंसेज और एग्जीबिशन्स) एवं लाइव इवेंट्स का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। भारत का माइस बाजार लगभग 37,576 करोड़ का हो चुका है तथा लाइव इवेंट्स सेक्टर के वर्ष 2028 तक 19,600 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में बढ़ती मांग को देखते हुए इंदौर और भोपाल में प्रमुख अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय आयोजन केंद्र बनने की व्यापक क्षमता है। उन्होंने राज्य में सिटी माइस प्रमोशन ब्यूरो के गठन, राज्य माइस रणनीति के निर्माण और बड़े कन्वेंशन वेन्यू विकसित करने का सुझाव दिया। इस सत्र का संचालन टॉर्नाेस के संस्थापक एवं सीईओ श्री प्रतीक हीरा ने किया।
डेस्टिनेशन वेडिंग्स और एक्सपीरियंस इकोनॉमी को बढ़ावा
सत्र के दौरान फिक्की एमआईसीई टूरिज्म कमेटी के अध्यक्ष एवं विज़क्राफ्ट ग्रुप के सह-संस्थापक सब्बास जोसेफ ने ष्मध्यप्रदेशरू द एक्सपीरियंस इकोनॉमी अपॉर्चुनिटीष् पर प्रस्तुति दी। उन्होंने रेखांकित किया कि ओरछा, खजुराहो, महेश्वर, मांडू और ग्वालियर जैसे ऐतिहासिक व सांस्कृतिक नगर अनूठे डेस्टिनेशन वेडिंग्स और उत्सव आयोजनों के लिए सर्वथा उपयुक्त हैं। उन्होंने वेडिंग प्लानर्स के लिए परिचयात्मक भ्रमण, प्रमाणित विवाह स्थलों एवं सेवा प्रदाताओं का पोर्टफोलियो तैयार करने तथा प्रदेश के पारंपरिक व्यंजन, कला-संस्कृति, हथकरघा और शिल्पकला को शामिल करते हुए संपूर्ण समारोह पैकेज विकसित करने पर बल दिया।
सुरक्षित एवं समग्र एडवेंचर हब्स का होगा विकास
एडवेंचर टूरिज्म 2030 राउंडटेबल में प्रदेश को साहसिक पर्यटन का अग्रणी राज्य बनाने पर मंथन हुआ। सचिव पर्यटन और मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी. ने प्रदेश में एडवेंचर टूरिज्म की संभावनाओं को नई दिशा देने के लिए वर्ष 2027 को एडवेंचर ईयर के रूप में मानते हुए साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास करने की बात कही।
सत्र के मुख्य वक्ता पद्मश्री अजीत बजाज ने कहा कि मध्यप्रदेश में एडवेंचर पार्क्स और अधोसंरचना का विकास सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल पर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अलग-अलग गतिविधियों के स्थान पर समग्र एडवेंचर हब्स बनाए जाएं। साथ ही साहसिक गतिविधियों में सुरक्षा मानकों, प्रमाणित गाइड्स, गतिविधि-वार मानक संचालन प्रक्रियाओं, आपातकालीन बचाव तंत्र और चिकित्सा बीमा व्यवस्था को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाए। राउंडटेबल में अपर प्रबंध संचालक डॉ. अभय अरविंद बेडेकर तथा संयुक्त संचालक (एडवेंचर) संतोष कुमार श्रीवास्तव भी उपस्थित रहे।




