MP: पुजारी नियुक्ति नीति पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को चार सप्ताह का अंतिम मौका

MP Priest Appointment Policy: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सरकार नियंत्रित मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार को कड़ा रुख अपनाते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय सीमा में जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने पर सरकार का पक्ष रखने का अवसर स्वतः समाप्त माना जाएगा।

MP Priest Appointment Policy: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा नियंत्रित मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति के लिए बनाई गई नीति को लेकर एक बार फिर कानूनी विवाद गहरा गया है। इस संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जबलपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का अंतिम अवसर दिया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि तय समय सीमा के भीतर जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने पर सरकार का पक्ष रखने का अवसर समाप्त माना जाएगा।

युगलपीठ ने सरकार को दी अंतिम चेतावनी

मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने की। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से एक बार फिर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया, जिस पर अदालत ने नाराजगी जताई। इसके बाद न्यायालय ने सरकार को अंतिम मौका देते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

2019 की नियुक्ति नीति पर उठे सवाल

याचिकाकर्ता अजाक्स (AJAKS), भोपाल के सचिव एम.सी. अहिरवार की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के प्रमुख सचिव ने 4 फरवरी 2019 को सरकार नियंत्रित मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति के लिए एक नीति लागू की थी। याचिका में दावा किया गया है कि इस नीति के तहत नियुक्ति प्रक्रिया में केवल ब्राह्मण समुदाय को प्राथमिकता दिए जाने का प्रावधान है।

संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप

याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस व्यवस्था के कारण अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के योग्य अभ्यर्थियों को पुजारी बनने के समान अवसर नहीं मिल रहे हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को केवल जाति के आधार पर अवसर से वंचित करना संविधान में प्रदत्त समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

नीति की न्यायिक समीक्षा की मांग

याचिका में हाईकोर्ट से अनुरोध किया गया है कि राज्य सरकार की पुजारी नियुक्ति नीति की न्यायिक समीक्षा की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि नियुक्ति प्रक्रिया संविधान के समानता और भेदभाव-रहित सिद्धांतों के अनुरूप हो। फिलहाल मामले में राज्य सरकार के जवाब का इंतजार है, जिसके बाद हाईकोर्ट आगे की सुनवाई करेगा।

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