MP: हाईकोर्ट ने डीजे की कान फाड़ आवाज पर सख्त टिप्पणी, कहा- जागरूकता से ही संभव है समाधान

Jabalpur Highcourt News: ध्वनि प्रदूषण और डीजे की तेज आवाज से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की कि केवल कानून ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नागरिकों का जागरूक होना भी बेहद जरूरी है। कोर्ट ने माना कि तेज ध्वनि अब एक गंभीर जनसमस्या बन चुकी है।

Jabalpur Highcourt News: हाईकोर्ट ने शादियों और धार्मिक आयोजनों में बजाए जाने वाले डीजे की अत्यधिक तेज आवाज को गंभीर जनसमस्या करार दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए सिर्फ सरकारी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि नागरिकों को खुद जागरूक होना होगा।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने गुरुवार को ध्वनि प्रदूषण संबंधी एक याचिका की सुनवाई करते हुए यह तल्ख टिप्पणी की।

डीजे की तेज आवाज से स्वास्थ्य पर गंभीर असर

याचिका नाना देशमुख वेटनरी यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति गोविंद प्रसाद मिश्रा (83 वर्ष) और सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी आर.पी. श्रीवास्तव (100 वर्ष) समेत छह लोगों ने दायर की थी। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि शादियों और धार्मिक कार्यक्रमों में डीजे 100 डेसिबल से भी अधिक तेज आवाज में बजाए जाते हैं, जबकि मानव शरीर केवल 75 डेसिबल तक की आवाज ही सहन कर सकता है। इससे अधिक आवाज ध्वनि प्रदूषण की श्रेणी में आती है। याचिका में दावा किया गया कि डीजे की तेज आवाज के कारण लोगों में हार्ट अटैक, उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) और बहरेपन जैसी गंभीर बीमारियां बढ़ रही हैं। कई मामलों में तेज आवाज सुनकर हार्ट अटैक से मौत भी हो चुकी है।

कोलाहल एक्ट के तहत जुर्माना

सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से पेश जवाब में कहा गया कि डीजे की कान फाड़ देने वाली तेज आवाज वाकई एक बड़ी जनसमस्या बन गई है। सरकार ने बताया कि कोलाहल (नॉइज पॉल्यूशन) एक्ट के तहत निर्धारित सीमा से ज्यादा आवाज में डीजे बजाने पर जुर्माने की कार्रवाई की जा रही है।

केवल जुर्माना पर्याप्त नहीं

याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट को अवगत कराया कि सुप्रीम कोर्ट भी ध्वनि प्रदूषण को गंभीर मुद्दा मान चुका है। उन्होंने कहा कि केवल जुर्माना लगाने से इस समस्या पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। तेज आवाज से लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

कोर्ट की टिप्पणी

युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “इस समस्या का समाधान तभी संभव है जब आम नागरिक खुद जागरूक हों और अनावश्यक तेज आवाज से बचें।”कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए बाद की तारीख तय की है।

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