MP: हाई कोर्ट ने डायल 112 फेज-2 प्रोजेक्ट की 972 करोड़ की लागत पर उठाए सवाल

Dial 112 Controversy: मध्य प्रदेश में डायल 112 फेज-2 प्रोजेक्ट को लेकर उठा विवाद अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की दहलीज पर पहुंच गया है। इस 972 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत वाले प्रोजेक्ट और टेंडर की शर्तों पर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार पर तीखी टिप्पणी की है।सुनवाई के दौरान जब 1200 वाहनों पर कुल 972 करोड़ रुपये खर्च होने की बात सामने आई, तो कोर्ट ने मौखिक रूप से पूछा कि “क्या डायल-112 में मर्सिडीज चल रही हैं?” इससे प्रोजेक्ट की लागत और वाहनों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठे हैं।

Dial 112 Controversy: मध्य प्रदेश में डायल 112 फेज-2 प्रोजेक्ट को लेकर छिड़ा विवाद अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट पहुंच गया है। 972 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत और टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाई है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने परियोजना की लागत पर गहरी हैरानी जताई और मौखिक टिप्पणी में पूछा, “क्या आप डायल 112 में मर्सिडीज कार चला रहे हैं?”

हाई कोर्ट ने लगाई नई टेंडर पर अंतरिम रोक

अदालत ने 6 करोड़ 29 लाख रुपये के कंप्यूटर आधारित प्रेषण (CAD) सॉफ्टवेयर के लिए जारी नए टेंडर पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही, पुलिस विभाग से वर्तमान सॉफ्टवेयर की कार्यक्षमता, कमियों और प्रदर्शन पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है।

EMRI का आरोप और सरकार का बचाव

ईएमआरआई ग्रीन हेल्थ सर्विसेज (EMRI) का दावा है कि मार्च 2025 में उन्हें सिस्टम इंटीग्रेटर के रूप में नियुक्त किया गया था और सितंबर 2025 से सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। कंपनी का कहना है कि दिसंबर 2025 में सॉफ्टवेयर के लिए अलग से टेंडर जारी करना मूल अनुबंध की शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन है।

दूसरी ओर, राज्य सरकार और पुलिस विभाग का तर्क है कि 972 करोड़ रुपये की कुल लागत केवल वाहनों तक सीमित नहीं है। इसमें डेटा सेंटर, उन्नत तकनीकी ढांचा, परिचालन खर्च, रखरखाव और अन्य घटक शामिल हैं। विभाग का कहना है कि मौजूदा सॉफ्टवेयर में गंभीर तकनीकी खामियां हैं, जिन्हें दूर करने के लिए नया टेंडर जरूरी था।

प्रोजेक्ट का उद्देश्य और वर्तमान स्थिति

डायल 112 फेज-2 के तहत प्रदेश में 1200 आधुनिक वाहनों के माध्यम से आपातकालीन पुलिस सहायता को और तेज, प्रभावी व पारदर्शी बनाने का लक्ष्य है। यह परियोजना नागरिकों की सुरक्षा और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए महत्वाकांक्षी कदम मानी जा रही है। हालांकि, टेंडर विवाद और तकनीकी-कानूनी पेचीदगियों के कारण प्रोजेक्ट की प्रगति पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। हाई कोर्ट की सख्ती से अब सरकार पर जवाबदेही बढ़ गई है और मामले की अगली सुनवाई में बड़ा फैसला आ सकता है।

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