MP Chief Secretary Warns Officials: मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कलेक्टरों-एसपी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में सख्त रुख अपनाते हुए भ्रष्टाचार और लंबित शिकायतों पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, गलत काम करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। जनता की शिकायतों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
MP Chief Secretary Warns Officials: मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने बुधवार को कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों (एसपी) के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पर कड़ी टिप्पणी की। सुशासन की समीक्षा बैठक में उन्होंने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का जिक्र करते हुए साफ कहा कि यदि कोई अधिकारी रिश्वतखोरी में शामिल है तो उसे तत्काल हटा दिया जाए।
भ्रष्टाचार पर मुख्य सचिव की सख्त चेतावनी
मुख्य सचिव ने बैठक में एक मामला साझा किया कि मुख्यमंत्री तक शिकायतें पहुंच रही हैं कि कई कलेक्टर बिना लेन-देन (रिश्वत) के काम नहीं करते। उन्होंने अफसरों को दो टूक कहा, “भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी अधिकारी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे लोगों को हटा दीजिए।” उनकी इस टिप्पणी से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में जुड़े कई कलेक्टर असहज नजर आए। लंबे समय से टल रही यह बैठक आखिरकार बुधवार को हुई, जिसमें प्रशासनिक कमियों का पर्दाफाश हुआ।
शिकायतों की अनदेखी और पुलिस की लापरवाही उजागर
बैठक में सामने आया कि जनता की शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है। शासन स्तर पर लाखों शिकायतें लंबित हैं। इंदौर से एक शिकायत में एफआईआर दर्ज न होने का मामला उठा। जब मुख्य सचिव ने पुलिस कमिश्नर से जवाब मांगा तो वे वीडियो पर मौजूद नहीं थे और उनका फोन भी बंद मिला। इससे नाराज मुख्य सचिव ने सख्त निर्देश दिए कि आगे से ऐसी बैठकों में एसपी की मौजूदगी अनिवार्य होगी, चाहे डीजीपी मौजूद हों या नहीं।
अवैध गतिविधियों पर विशेष अभियान के आदेश
मुख्य सचिव ने अवैध खनन और समाज विरोधी तत्वों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। भिंड, मुरैना, शहडोल, जबलपुर और नरसिंहपुर जैसे जिलों को विशेष निगरानी में रखते हुए अभियान चलाने को कहा गया। संकरी गलियों और संवेदनशील बस्तियों वाले 24 जिलों में जोनल प्लान तैयार हो चुके हैं, जबकि बाकी जिलों को तीन महीने के अंदर यह काम पूरा करने के निर्देश दिए गए।
एससी-एसटी अत्याचार और अन्य मामलों में लापरवाही
समीक्षा में पता चला कि एससी-एसटी अत्याचार के मामलों में पीड़ितों को समय पर राहत नहीं मिल रही। कई जिलों में हिट एंड रन मामलों में मुआवजा अभी तक वितरित नहीं हुआ। सीमांकन, नामांतरण और बंटवारे जैसे राजस्व मामलों में कुछ जिले रेड जोन में चिह्नित हैं।
ई-केवाईसी और सीएम हेल्पलाइन पर भी सवाल
समग्र आईडी की ई-केवाईसी में भोपाल और इंदौर जैसे बड़े जिले पिछड़ते दिखे। सीएम हेल्पलाइन पर उच्च स्तर (एल-3 और एल-4) की बड़ी संख्या में शिकायतें लंबित हैं, जिनमें से कई की समयसीमा समाप्त हो चुकी है। मुख्य सचिव ने इन कमियों को दूर करने के लिए सख्ती से काम करने के निर्देश दिए।
