MP Health News: कैंसर मरीजों पर बढ़ा इलाज का बोझ, कीमोथेरेपी की जरूरी दवाएं हुईं महंगी

MP Health News: मध्य प्रदेश सहित देशभर के कैंसर मरीजों के लिए इलाज अब और महंगा होने जा रहा है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) द्वारा कैंसर उपचार में उपयोग होने वाली प्रमुख कीमोथेरेपी दवाओं सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन की कीमतों में बढ़ोतरी किए जाने के बाद मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार इन दवाओं के महंगे होने से एक कीमो साइकिल का खर्च 2 से 3 हजार रुपये तक बढ़ सकता है, जबकि कई मरीजों को उपचार के दौरान 4 से 6 या उससे अधिक कीमोथेरेपी साइकिल की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में इलाज की कुल लागत में हजारों रुपये की बढ़ोतरी होने की आशंका है।

MP Health News:मध्य प्रदेश सहित देशभर के कैंसर मरीजों के लिए इलाज अब पहले की तुलना में अधिक महंगा होने जा रहा है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) द्वारा कैंसर उपचार में व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली दो प्रमुख कीमोथेरेपी दवाओं सिस्प्लैटिन (Cisplatin) और कार्बोप्लैटिन (Carboplatin) की कीमतों में वृद्धि किए जाने के बाद मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन दवाओं की कीमत बढ़ने से एक कीमो साइकिल (Chemotherapy Cycle) का खर्च 2 से 3 हजार रुपये तक बढ़ सकता है।

कई प्रकार के कैंसर के इलाज में होती हैं उपयोगी

सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन का उपयोग ओवरी कैंसर (Ovarian Cancer), फेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer), स्तन कैंसर (Breast Cancer), सिर और गर्दन के कैंसर (Head & Neck Cancer) समेत कई गंभीर बीमारियों के उपचार में किया जाता है। कई मरीजों को उपचार के दौरान 4 से 6 या उससे अधिक कीमोथेरेपी साइकिल की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में दवाओं की कीमत बढ़ने का सीधा असर इलाज की कुल लागत पर पड़ेगा।

दवाओं की कमी से अस्पताल भी प्रभावित

कैंसर विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश के कई अस्पतालों में इन जरूरी दवाओं की उपलब्धता प्रभावित हुई है। हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और सप्लाई चेन (Supply Chain) में आई बाधाओं के कारण प्लैटिनम आधारित दवाओं (Platinum-Based Drugs) की आपूर्ति प्रभावित हुई। बताया जा रहा है कि उत्पादन लागत बढ़ने और सीमित उपलब्धता के कारण कुछ दवा कंपनियों ने उत्पादन कम कर दिया था। हालांकि अब उत्पादन दोबारा शुरू हो गया है, लेकिन मांग के अनुरूप आपूर्ति सामान्य होने में अभी कुछ समय लग सकता है।

सात प्रमुख कैंसर उपचारों पर असर की आशंका

विशेषज्ञों का मानना है कि प्लैटिनम आधारित कीमोथेरेपी दवाओं की कमी और बढ़ती कीमतों का असर कैंसर के कई प्रमुख प्रकारों के इलाज पर पड़ सकता है। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि दवाओं की उपलब्धता प्रभावित रहती है, तो बड़ी संख्या में मरीजों को वैकल्पिक उपचार पद्धतियों पर निर्भर होना पड़ सकता है, जिससे इलाज का खर्च और बढ़ सकता है।

डॉक्टरों को बदलनी पड़ रही उपचार रणनीति

कैंसर विशेषज्ञों के अनुसार सिस्प्लैटिन, कार्बोप्लैटिन और ऑक्सालिप्लैटिन (Oxaliplatin) जैसी आवश्यक दवाओं की सीमित उपलब्धता के कारण कई मामलों में डॉक्टरों को उपचार रणनीति (Treatment Protocol) में बदलाव करना पड़ रहा है।
विशेष रूप से सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में इन दवाओं की कमी का प्रभाव अधिक देखने को मिल रहा है।
हालांकि अन्य कीमोथेरेपी दवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन कुछ विशेष प्रकार के कैंसर में प्लैटिनम आधारित दवाओं का विकल्प सीमित माना जाता है।

सरकार ने दी कीमत बढ़ाने की मंजूरी

केंद्र सरकार ने सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन की कीमतों में वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। दवा निर्माताओं की ओर से उत्पादन लागत (Production Cost) बढ़ने और बाजार में कमी की स्थिति का हवाला देते हुए कीमतों में संशोधन की मांग की गई थी। सरकारी मंजूरी के बाद इन दवाओं की कीमतों में लगभग 10 से 50 प्रतिशत तक वृद्धि का रास्ता साफ हो गया है। इसका उद्देश्य दवाओं का उत्पादन बनाए रखना और बाजार में उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।

युद्ध और वैश्विक हालात का पड़ा असर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी संघर्षों और कच्चे माल की आपूर्ति में आई रुकावटों ने दवा उद्योग को भी प्रभावित किया है। विशेष रूप से प्लैटिनम आधारित दवाओं की सप्लाई (Drug Supply) प्रभावित होने से इनके उत्पादन और कीमत दोनों पर असर पड़ा है।

सिस्प्लैटिन को माना जाता है सबसे भरोसेमंद विकल्प

भोपाल के कैंसर विशेषज्ञों के अनुसार सिस्प्लैटिन पिछले दो से तीन दशकों से कैंसर उपचार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। रेडियोथेरेपी (Radiotherapy) के साथ इसका उपयोग उपचार की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए किया जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जहां सिस्प्लैटिन आधारित उपचार अपेक्षाकृत कम लागत में संभव हो जाता है, वहीं इसके कई वैकल्पिक उपचार जैसे इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy) लाखों रुपये तक खर्च करा सकते हैं। यही कारण है कि मध्यम और निम्न आय वर्ग के मरीजों के लिए यह दवा बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

मरीजों पर बढ़ेगा आर्थिक दबाव

दवाओं की कीमतों में वृद्धि और सीमित उपलब्धता का सीधा असर कैंसर मरीजों के इलाज पर पड़ सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो मरीजों को न केवल अधिक खर्च उठाना पड़ेगा बल्कि कुछ मामलों में उपचार में देरी की स्थिति भी बन सकती है।

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