मोहन कैबिनेट के बड़े फैसले: 46 लाख लोगों की रजिस्ट्री का खर्च उठाएगी सरकार, युवाओं के लिए नया इंटर्न प्रोग्राम

MP Cabinet Decisions: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (MP CM Mohan Yadav) की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। इन निर्णयों का सीधा असर प्रदेश के लाखों ग्रामीणों, युवाओं और किसानों पर पड़ने वाला है। कैबिनेट बैठक के बाद सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप ने इन फैसलों की जानकारी दी।

भूमि स्वामित्व योजना: 46 लाख ग्रामीणों की रजिस्ट्री का स्टांप शुल्क भरेगी सरकार

कैबिनेट बैठक में सबसे बड़ा फैसला भूमि स्वामित्व योजना (Land Ownership Scheme MP) को लेकर लिया गया। राज्य सरकार ने तय किया है कि इस योजना के तहत ग्रामीणों की संपत्ति की रजिस्ट्री पर लगने वाला स्टांप शुल्क सरकार खुद वहन करेगी।

प्रदेश में इस योजना के तहत करीब 46 लाख ग्रामीण नागरिकों को उनकी जमीन का स्वामित्व अधिकार मिलेगा। सरकार के इस फैसले से ग्रामीणों को अपनी जमीन का कानूनी अधिकार मिलेगा और भूमि से जुड़े विवाद कम होने की उम्मीद है।

साथ ही जमीन का मालिकाना हक मिलने के बाद ग्रामीणों के लिए बैंकों से ऋण लेना भी आसान हो जाएगा।
इस फैसले से सरकार पर करीब 3000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा।

युवाओं के लिए “सीएम यंग इंटर्न्स फॉर गुड गवर्नेंस” कार्यक्रम

कैबिनेट बैठक में युवाओं के लिए भी एक नया कार्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया गया है। सरकार ने “सीएम यंग इंटर्न्स फॉर गुड गवर्नेंस प्रोग्राम” (CM Young Interns for Good Governance Program MP) लॉन्च करने का फैसला किया है। इस कार्यक्रम के तहत प्रदेश के हर विकासखंड से 15 युवाओं का चयन किया जाएगा। चयनित युवाओं को एक साल के अनुबंध पर नियुक्त किया जाएगा और उन्हें हर महीने 10 हजार रुपये मानदेय दिया जाएगा। प्रदेश भर में कुल 4865 युवाओं को इस कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा। यह योजना तीन साल तक चलेगी, जिस पर सरकार करीब 170 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

इन युवाओं की जिम्मेदारी अपने-अपने विकासखंड में चल रही सरकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति का आकलन करना और फीडबैक देना होगी। यह रिपोर्ट सुशासन एवं नीति विश्लेषण स्कूल के माध्यम से सीधे मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों तक पहुंचेगी। इसके लिए एक डैशबोर्ड और डिजिटल पोर्टल भी विकसित किया जाएगा।

सात विभागों की योजनाओं को 2031 तक जारी रखने की मंजूरी

कैबिनेट बैठक में प्रदेश के कई विभागों की योजनाओं को आगे जारी रखने का भी निर्णय लिया गया। ऊर्जा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, योजना-आर्थिक एवं सांख्यिकी, जनजातीय कार्य और महिला-बाल विकास सहित सात विभागों की योजनाओं को वर्ष 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दी गई है।

इन योजनाओं के लिए सरकार ने 33 हजार 240 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है।

इन योजनाओं में महिला आयोग, बाल संरक्षण आयोग, छात्रवृत्ति योजनाएं, आरडीएसएस योजना, दिव्यांगजनों के लिए प्रोफेशनल टैक्स में छूट और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान शामिल है।

अस्पतालों में भर्ती और न्यायिक पदों को मंजूरी

कैबिनेट बैठक में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए भी फैसला लिया गया। मैहर, निमरानी और कैमोर में पीएफआईसी योजना के तहत अस्पतालों के लिए स्टाफ भर्ती की जाएगी।

श्रम विभाग के माध्यम से डॉक्टर और अन्य कर्मचारियों सहित कुल 51 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इसके अलावा चितरंगी में व्यवहार न्यायाधीश के पद को भी मंजूरी दी गई है।

“एक जिला-एक उत्पाद” योजना को बढ़ावा

कैबिनेट ने “एक जिला-एक उत्पाद” योजना को बढ़ावा देने का भी फैसला किया है। इसके तहत प्रदेश के स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग और प्रचार के लिए 37 करोड़ 50 लाख रुपये की डीपीआर तैयार की गई है।

इस योजना को एमएसएमई, उद्योग और कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग संयुक्त रूप से लागू करेंगे, जिससे स्थानीय उद्योगों और कारीगरों को प्रोत्साहन मिलेगा।

किसानों के लिए बोनस का ऐलान

कैबिनेट बैठक में किसानों से जुड़ा भी एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। सरकार ने गेहूं की खरीदी 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करने का फैसला किया है। इसमें केंद्र सरकार के 2585 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी पर 40 रुपये बोनस जोड़ा गया है। इसके अलावा उड़द की फसल पर 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का भी निर्णय लिया गया है।

कुल मिलाकर कहा जाए तो मोहन यादव सरकार की इस कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसले ग्रामीणों को जमीन का मालिकाना हक, युवाओं को रोजगार के अवसर, किसानों को आर्थिक राहत और सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

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