भोपाल। मोहन कैबिनेट ने स्वास्थ्य अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026 को मंजूरी दे दी है। नीति का उद्देश्य प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करना और अस्पतालों तथा डायग्नोस्टिक केंद्रों को प्रोत्साहन देना है। इसके तहत स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत परोपकारी, सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं द्वारा संचालित अस्पतालों एवं डायग्नोस्टिक केंद्रों को विशेष सहायता प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही कैबिनेट ने तबादला नीति को 24 घंटे के लिए छूट दी है। इसके अलावा कैबिनेट ने विभिन्न विभागों की करीब 24 हजार करोड़ रुपए लागत वाली योजनाओं को निरंतर जारी रखने के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी है।
रीवा, देवास और गुना के सामुदायिक केंद्र होगे निजी हाथों में
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जो 20 बिस्तर के ऊपर है डॉक्टर और स्टाफ की कमी देखी गई है, विशेषज्ञ नहीं है। इसे देखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि तीन जिलों में रीवा, देवास और गुना में 18 सामुदायिक केंद्रों के निजी तौर पर संचालन के लिए दिए जाएगा। यह नई नीति पायलट प्रोजेक्ट के रूप में स्वीकृति दी गई है। निजी व्यक्ति डॉक्टर, स्टाफ से लेकर पूरे संसाधन लेकर आएंगे। परिसंपत्ति सरकार की रहेगी और दवाइयां की उपलब्धता सरकार द्वारा की जाएगी। टेंडर की प्रक्रिया करेंगे, जो कम से कम लागत का आफर देगा, उसे दिए जाएंगे।
परोपकारी संस्थाओं को अस्पताल के लिए सरकार करेगी मदद
कैबिनेट में निणर्य लिया गया है कि परोपकारी व कल्याणकारी संस्थाएं यदि कोई चिकित्सालय मध्य प्रदेश में लगाना चाहती हैं तो उन्हें सरकार जमीन उपलब्ध कराएगी। सुपर स्पेशलिटी के उपकरणों को क्षेत्रवार मशीनों के लिए पूंजीगत अनुदान दिया जाएगा। नीति के अनुसार, इन संस्थाओं को बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, आधुनिक उपकरणों की खरीद और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार की ओर से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी। इस योजना के कार्यान्वयन और आवश्यक मानदंड तय करने के लिए पांच कैबिनेट मंत्रियों की एक समिति गठित की गई है, जो सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपेगी।




