Monsoon in MP मध्यप्रदेश पहुचा मानसून, 72 घंटे में कवर करेगा पूरा प्रदेश, रीवा संभाग में उमस-गर्मी, मानसून का होता है ऐसे आंकलन

Monsoon in MP। किसानों और गर्मी से तंग लोगो के लिए अच्छी खबर सामने आ रही है, क्योंकि Monsoon in MP पहुच गया है और 72 घंटे के अंतराल में पूरा प्रदेश बादलों से ढ़क जाएगा एवं बारिश होगी। ज्ञात हो कि इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से 9 दिन की देरी के बाद मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में पहुंचा है। बारिश की गतिविधियों को देखते हुए, मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 2 से 3 दिनों में मानसून राज्य के बाकी हिस्सों को कवर करके पूरे क्षेत्र में झमाझम बारिश कराएगा।

इन जिलों में पहुंच चुका है मानसून

मौसम विभाग ने अलीराजपुर, बड़वानी, धार, इंदौर, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला और डिंडौरी में मानसून के प्रवेश की आधिकारिक घोषणा कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले दो से चार दिनों में मानसून पूरे प्रदेश को कवर कर लेगा। हालांकि प्रदेश के कुछ हिस्सों में अभी भी गर्मी और उमस बनी रहेगी। नीमच, मंदसौर, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, रीवा और सिंगरौली में दिनभर उमस भरा मौसम रहने का अनुमान है, जबकि सीधी जिले में लू चलने की चेतावनी जारी की गई है।

46 जिलों में अलर्ट

मौसम की जो स्थित देखी जा रही है, उसके 24 घंटो के अंतराल में राज्य के 46 जिलों में तेज आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग से जो जानकारी आ रही है, उसके तहत भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन समेत कुल 46 जिलों में भारी बारिश और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने का ऑरेंज, येलो अलर्ट जारी किया गया है।

हवा, नमी और बारिश के आधार पर तय होता है मानसून

किसी क्षेत्र में मानसून के प्रवेश की घोषणा हवा, नमी और बारिश के आधार पर होती है। मौसम वैज्ञानिक यह देखते हैं कि किसी निर्दिष्ट क्षेत्र में पिछले 48 घंटों में अच्छी-खासी बारिश दर्ज की गई हो। हवा का रुख पश्चिमी हवाओं की जगह मानसूनी (पूर्वी) हवाओं की दिशा का स्थापित होना जरूरी है। नमी और सैटेलाइट तस्वीरें यानि की उपग्रह से मिली तस्वीरों और अन्य उपकरणों के माध्यम से वायुमंडल में नमी का स्तर मापा जाता है।

वर्षा का पैमाना- जब किसी क्षेत्र में लगातार दो दिनों तक निर्दिष्ट मौसम केंद्रों पर 2.5 मिमी या उससे अधिक बारिश दर्ज की जाती है।
हवा का रुख- हवा की दिशा में बदलाव (समुद्र से जमीन की ओर नमी वाली हवाएं) और निचले वायुमंडल में हवा की गति।
उपग्रह डेटा- सैटेलाइट इमेजरी के जरिए बादलों के घनत्व, गहराई और आर्द्रता का सटीक विश्लेषण किया जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *