एमपी में अफसरों के सरकारी खर्चे पर बड़ा लगाम, विदेश यात्रा और होटलों में मीटिंग पर रोक

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी खर्चों पर नियंत्रण लाने के लिए बड़ा कदम उठा रही है। जिससे प्रदेश के सरकारी बजट पर बढ़ रहा भारी भरकम बोझ को कंम किया जा सकें। सरकार का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में करीब 10 हजार करोड़ रुपये तक की आय कम हो सकती है। ऐसे में सरकार ने अधिकारियों की विदेश यात्राओं, होटलों में होने वाले कार्यक्रमों, सरकारी उपहार, कैलेंडर-डायरी की छपाई और अतिरिक्त वाहनों जैसी कई सुविधाओं पर रोक लगाने का फैसला किया है।

विशेष अनुमति पर कर सकेगे सरकारी खर्चे पर विदेश यात्रा

मध्य प्रदेश में अब सरकारी पैसे का इस्तेमाल पहले की तुलना में कहीं अधिक सख्ती से होगा। वित्त विभाग ने सभी विभागों, निगमों, मंडलों और सरकारी संस्थानों को मितव्ययिता अपनाने के निर्देश जारी किए हैं। नए आदेश के मुताबिक अब सरकारी खर्च पर विदेश यात्रा केवल विशेष अनुमति मिलने पर ही संभव होगी। अधिकारियों की हवाई यात्रा भी सिर्फ इकोनॉमी क्लास में होगी। होटलों और निजी संस्थानों में कार्यशालाओं व बैठकों के बजाय सरकारी भवनों या ऑनलाइन वेबिनार को प्राथमिकता दी जाएगी। इतना ही नहीं, नए साल पर छपने वाले सरकारी कैलेंडर, डायरी, वीआईपी उपहार और स्वागत समारोहों पर होने वाले खर्च पर भी रोक लगा दी गई है। कार्यालयों की गैर-जरूरी साज-सज्जा और अतिरिक्त वाहनों के उपयोग को भी सीमित किया जाएगा। अब कई अधिकारी एक ही वाहन का उपयोग करेंगे, ताकि सरकारी खर्च कम हो सके।

इस लिए किया जा रहा सरकारी खर्चे पर कटौती

सरकार का कहना है कि इस वित्तीय वर्ष में राजस्व अनुमान से लगभग 10 हजार करोड़ रुपये कम मिलने की आशंका है। इसी को देखते हुए गैर-जरूरी खर्चों में कटौती कर विकास कार्यों और जरूरी योजनाओं के लिए संसाधन बचाने की कोशिश की जा रही। सरकार का दावा है कि यह फैसला आर्थिक अनुशासन और सरकारी धन की बचत के लिए लिया गया है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन सख्त फैसलों से वास्तव में सरकारी खर्च कम होगा और बचाया गया पैसा जनता के विकास कार्यों तक पहुंचेगा?

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