भोपाल। मध्य प्रदेश की जीवनदायिनी कही जानी वाली नर्मदा नदी कई लोगो के जीवन का आधार है। नर्मदा सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि यह करोड़ों लोगो की आस्था और आजीविका का आधार है, लेकिन मध्य प्रदेश की यही जीवनरेखा बहुत लंबे समय से प्रदूषण अतिक्रमण की समस्याओं से जूझ रही है। कई स्थानों पर नालों का गन्दा पानी सीधे नदी में जाकर मिल रहा है। नदी और घाटों के आस पास कचरा और प्लास्टिक नर्मदा को दूषित कर रहे हैं। इन सभी समस्याओं को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने निर्मल एवं अविरल मां नर्मदा मिशन (नमन मिशन) बना रही है इसका पंजीयन सोसाइटी पंजीकरण एक्ट के अंतर्गत स्वायत्त संस्था के रूप में होगा।
नमन मिशन में होगे ये शामिल
नर्मदा के लिए पहले से गठित मंत्रिमंडल समिति, इंटर डिपार्टमेंट कमेटी और स्टेट मॉनिटरिंग सेल का नमन मिशन में विलय किया जायेगा। मुख्यमंत्री इसकी अध्यक्षता करेंगे। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति मिशन के कामकाज और परियोजनाओं की निगरानी करेगी। मिशन में नदी विज्ञान, जल, पर्यावरण और जैव विविधता से जुड़े विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा। नदी की स्थिति पर नजर रखने के लिए एआई, जीआईएस, डेटा एनालिटिक्स, रिमोट सेंसिंग और क्लाइमेट मॉडलिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। मिशन की जिम्मेदारी 6 विभाग मिलकर संभालेंगे, इसके लिए एक अंतर विभागीय समन्वय समिति बनाई गई है। ताकि योजना के क्रियान्वन में किसी तरह की देरी ना हो और सभी विभाग आपस में तालमेल बिठा कर काम कर सके।
सरकार हर साल देगी 100 करोड़
मिशन के लिए सरकार द्वारा हर साल 100 करोड़ का अनुदान दिया जायेगा। इसके तहत घाटों को इको-फ्रेंडली बनाया जायेगा और पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए रियल-टाइम वाटर क्वालिटी-मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया जायेगा। सीएसआर, केंद्रीय सहायता और पीपीपी मॉडल से भी राशि जुटाई जाएगी। यह नर्मदा संरक्षण के लिए की अब तक की सबसे बड़ी योजना होगी। इसका उद्देश्य नर्मदा को प्रदुषणमुक्त कर अविरल बनाये रखना है। मध्य प्रदेश की एक बड़ी आबादी नर्मदा नदी पर आधारित है। प्रदेश की 33 प्रतिशत जनसँख्या नर्मदा का पानी पीती है, वही खेती और अन्य जरूरतों के लिए भी नर्मदा का सहारा लिया जाता है।
नदी को साफ़ रखने के लिए बड़ा फैसला लिया गया है। नदी और घाट के 500 मीटर के दायरे में सिंगल ऊसे प्लास्टिक बन रहेगा। नमन मिशन के जरिये प्रमुख घाटों और धार्मिक स्थानों पर विशेष ध्यान दिया जायेगा। ऐसी जगहों पर सीवेज ट्रीटमेंट और सफाई व्यवस्था को बेहतर कर पर्यटन केंद्रों की तर्ज पर विकसित करना है।




