MP Transfer Policy-2026: मध्य प्रदेश सरकार ने तबादला नीति-2026 जारी करते हुए बड़ा सुधार किया है। नई नीति में अब प्रदर्शन लक्ष्य पूरे न करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को तीन साल की अवधि पूरी होने से पहले भी प्रशासनिक आधार पर प्राथमिकता से स्थानांतरित किया जा सकेगा। महिलाओं, गंभीर बीमारी से पीड़ित कर्मचारियों, दिव्यांगों और सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके कर्मचारियों को विशेष राहत दी गई है। सभी तबादला आदेश ऑनलाइन जारी होंगे और रिक्त पदों के लिए श्रृंखलाबद्ध तबादलों पर रोक लगाई गई है।
MP Transfer Policy-2026: मध्य प्रदेश सरकार ने तबादला नीति-2026 जारी कर दी है। नई व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब प्रदर्शन खराब रहने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर पहले ही स्थानांतरित किया जा सकेगा। (Transfer Policy)सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि तीन साल की अवधि अब अनिवार्य शर्त नहीं रहेगी। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी पिछले वित्तीय वर्ष में निर्धारित लक्ष्य (Performance Targets) पूरा नहीं कर पाता है तो उसे निर्धारित समय से पहले ही तबादले की सूची में शामिल किया जा सकता है। ऐसे मामलों को प्रशासनिक आधार (Administrative Grounds) पर प्राथमिकता दी जाएगी।
तीन साल पूरे होने से पहले भी संभव होगा तबादला
नई नीति के अनुसार, प्रथम और द्वितीय श्रेणी के कार्यपालिक अधिकारियों को एक जिले में तीन साल पूरे होने पर दूसरे जिले में भेजा जा सकेगा। इसी तरह तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों का भी एक जगह तीन साल या उससे अधिक समय बीतने पर तबादला किया जा सकेगा। (Employee Transfer)हालांकि विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि निर्माण और नियामक विभागों को छोड़कर बाकी जगहों पर सिर्फ तीन साल की अवधि को आधार न बनाया जाए। न्यायालय के आदेश, गंभीर शिकायतों, पदोन्नति और प्रतिनियुक्ति से वापसी जैसे मामलों में भी तबादले हो सकेंगे, लेकिन रिक्त पदों को भरने के लिए श्रृंखलाबद्ध तबादलों (Chain Transfers) पर पूरी तरह रोक रहेगी।
महिलाओं, पति-पत्नी और गंभीर बीमारी वाले कर्मचारियों को राहत
नई तबादला नीति में कई वर्गों को विशेष छूट दी गई है। अविवाहित, विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को गृह जिले (Home District) में ही पदस्थापन (Posting) का प्रावधान किया गया है। साथ ही जिन कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति में एक साल या उससे कम समय बचा है, उनका सामान्य परिस्थितियों में तबादला नहीं किया जाएगा। (Women Employees Relief)पति-पत्नी दोनों सरकारी सेवा में होने पर एक ही स्थान पर पोस्टिंग के लिए आवेदन स्वीकार किए जाएंगे, हालांकि अंतिम फैसला प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर होगा। गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, डायलिसिस और ओपन हार्ट सर्जरी के मरीजों को जिला मेडिकल बोर्ड की सिफारिश पर स्थानांतरण की छूट रहेगी। 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांग कर्मचारियों का तबादला सामान्यतः नहीं होगा, लेकिन उनकी इच्छा पर यह संभव रहेगा।
कर्मचारी संगठन और भ्रष्टाचार के मामलों में सख्ती
मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों को दो कार्यकाल यानी चार साल तक तबादले से छूट मिलेगी। वहीं वित्तीय अनियमितता, गबन या सरकारी धन के दुरुपयोग में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों को तुरंत पद से हटाया जा सकेगा।
सभी तबादला आदेश ऑनलाइन, ई-ऑफिस से जारी आदेश शून्य
सरकार ने साफ कर दिया है कि सभी स्थानांतरण आदेश (Transfer Orders) केवल ऑनलाइन जारी किए जाएंगे। 15 जून के बाद ई-ऑफिस से जारी कोई भी आदेश मान्य नहीं होगा। आदेश में ट्रेजरी में इस्तेमाल होने वाला एम्पलाई कोड (Employee Code) अनिवार्य रूप से दर्ज करना होगा। स्थानांतरित कर्मचारी के पुराने पद से वेतन आहरण बंद हो जाएगा। यदि इसके बाद भी वेतन निकाला गया तो इसे वित्तीय अनियमितता माना जाएगा। अवकाश भी नई जगह जॉइन करने के बाद ही स्वीकृत होगा।
जांच वाले अधिकारियों को कार्यपालिक पद नहीं
जिन अधिकारियों-कर्मचारियों पर नैतिक पतन से जुड़े आपराधिक मामले या विभागीय जांच लंबित है, उन्हें कार्यपालिक पदों (Executive Posts) पर नहीं लगाया जाएगा।अभ्यावेदन और संवर्ग व्यवस्था: कलेक्टर या विभागीय अधिकारियों द्वारा दिए गए तबादला आदेशों के खिलाफ अभ्यावेदन का फैसला संबंधित मंत्री की मंजूरी से होगा। पुलिस विभाग में अलग व्यवस्था रहेगी, जहां पुलिस स्थापना बोर्ड अहम भूमिका निभाएगा। यह नई तबादला नीति 1 जून से 15 जून तक लागू रहेगी।




