MP: मध्य-पूर्व एशिया में जारी युद्ध से MSME निर्माताओं पर भारी दबाव, आपूर्ति बाधित होने का खतरा

Middle East War Impact on Indian Pharma: दवा निर्माण कंपनियों ने सरकार से मांग की है कि सरकारी आपूर्ति में देरी होने पर लगने वाले दंडात्मक प्रावधानों को वर्तमान संकट की स्थिति में तत्काल निलंबित कर दिया जाए, क्योंकि लागत में भारी वृद्धि के कारण पुराने टेंडरों के तहत दवाओं की आपूर्ति अब संकटपूर्ण हो गई है; देश में इस्तेमाल होने वाले दवा कच्चे माल (एपीआई) का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात किया जाता है, जिसकी कीमतें युद्ध और सप्लाई चेन बाधाओं के चलते 30 से 70 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं, जिससे छोटे-मध्यम दवा निर्माताओं को बड़े वित्तीय नुकसान का गंभीर खतरा सता रहा है और कई इकाइयां बंद होने या दिवालिया होने की कगार पर पहुंच सकती हैं।

Middle East War Impact on Indian Pharma: मध्य-पूर्व एशिया में जारी युद्ध और तनाव के कारण भारत के दवा उद्योग गंभीर संकट का सामना कर रहा है। विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्यम (MSME) श्रेणी के दवा निर्माता प्रभावित हो रहे हैं, जो देश की जेनरिक दवाओं की सरकारी आपूर्ति का बड़ा हिस्सा संभालते हैं। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि कच्चे माल की कीमतों में 30 से 70 प्रतिशत तक की तेज वृद्धि, सप्लाई चेन में बाधाएं और सरकारी अनुबंधों की सख्त समय-सीमा के चलते हजारों इकाइयां वित्तीय दबाव में हैं।यदि समय रहते राहत नहीं मिली तो आने वाले 2-3 महीनों में बड़ी संख्या में दवा निर्माण इकाइयां बंद हो सकती हैं, जिससे अस्पतालों, स्वास्थ्य विभागों और आम जनता को आवश्यक दवाओं की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

कच्चे माल की आपूर्ति पर गहरा असर

भारत में दवा फैक्ट्रियों के लिए इस्तेमाल होने वाला करीब 75 प्रतिशत कच्चा माल (API और अन्य सामग्री) विदेशों से आयात किया जाता है। मध्य-पूर्व में युद्ध के कारण शिपिंग रूट्स बाधित होने, फ्रेट लागत बढ़ने और सप्लायरों द्वारा नकद भुगतान पर ही सामग्री उपलब्ध कराने से स्थिति और जटिल हो गई है। पैकेजिंग सामग्री सहित अन्य इनपुट्स की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं। एमएसएमई दवा इकाइयों को सरकारी टेंडरों के तहत आपूर्ति करने के बाद भुगतान में महीनों की देरी होती है, जबकि अब खरीद नकद आधार पर हो रही है। इससे कैश फ्लो का संकट गहरा गया है।

एमएसएमई एसोसिएशन ने सरकार से की ये प्रमुख मांगें

स्माल एंड मीडियम ड्रग मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन सहित अन्य संबंधित संगठनों ने केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव और संबंधित विभागों को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, जिसमें एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. दर्शन कटारिया और सचिव अजयसिंह दासुंडी ने वर्तमान संकट के मद्देनजर नीतिगत बदलाव पर जोर देते हुए प्रमुख मांगें रखी हैं. पूर्व में किए गए सरकारी अनुबंधों/टेंडरों की आपूर्ति अवधि में कम से कम 60 दिनों का विस्तार, देरी पर लगने वाले दंडात्मक प्रावधानों को संकट काल में निलंबित करना, पुराने लंबित भुगतानों का तुरंत निपटारा, जीवन रक्षक एवं आवश्यक दवाओं के लिए 6 महीने की आवश्यकता पूर्ति हेतु अलग से शॉर्ट टेंडर जारी करना जिसमें भुगतान नकद आधार पर हो, तथा कच्चे माल और अन्य इनपुट्स पर मूल्य सीमा निर्धारित करने या राहत पैकेज की व्यवस्था करना।

एसोसिएशन का कहना है कि ये कदम न उठाए गए तो कई इकाइयां ब्लैकलिस्ट होने या वित्तीय दिवालियापन के कगार पर पहुंच सकती हैं। देश में केंद्रीय एवं राज्य स्वास्थ्य निकायों तथा अस्पतालों को मिलने वाली जेनरिक दवाओं का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं एमएसएमई इकाइयों से आता है।

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