सिंगरौली: जिले के परसदेही गांव में पावरग्रिड कंपनी के हाईटेंशन टावर निर्माण के दौरान हुए एक बड़े विवाद में जमीन मालिक जगदीश शाह की दर्दनाक मौत हो गई। इस पूरी घटना का एक लाइव वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें जमीन मालिक लोहे के पाइप के साथ उछलकर गहरे गड्ढे में गिरते हुए साफ दिखाई दे रहे हैं। इस हादसे के बाद से ही पूरे गांव में भारी तनाव का माहौल व्याप्त है और पीड़ित परिजनों ने कंपनी के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
परिजनों का आरोप: बिना मुआवजा दिए जबरन कराया जा रहा था निर्माण
मृतक जगदीश शाह के परिजनों का सीधा आरोप है कि पावरग्रिड कंपनी के अधिकारी और ठेकेदार राहुल पांडेय बिना कोई मुआवजा दिए और बिना किसी कानूनी अनुमति के पट्टे की निजी जमीन पर जबरन हाईटेंशन टावर का निर्माण करा रहे थे। परिजनों का कहना है कि जब जगदीश शाह ने इस तानाशाही रवैये और अवैध निर्माण का कड़ा विरोध किया, तो इसी विवाद के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी जान चली गई। पीड़ित परिवार ने मामले में तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज कर ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस का दावा: नशे की हालत में मजदूरों से विवाद और गड्ढे में गिरने से हुआ हादसा
दूसरी ओर, कोतवाली थाना प्रभारी अशोक सिंह परिहार ने मामले की प्रारंभिक जांच के हवाले से अलग ही तस्वीर पेश की है। पुलिस के मुताबिक, शुरुआती तफ्तीश में यह सामने आया है कि जमीन मालिक जगदीश शाह कथित रूप से नशे की हालत में निर्माण स्थल पर पहुंचे थे, जहां उन्होंने काम कर रहे मजदूरों से विवाद कर उन्हें वहां से भगा दिया। इसके बाद जब उन्होंने मौके पर रखे एक भारी-भरकम लोहे के पाइप को खुद उठाने का प्रयास किया, तो पाइप अचानक फिसल गया। पाइप के साथ ही जगदीश शाह भी करीब 15 फीट गहरे गड्ढे में जा गिरे और गिरने के दौरान लोहे के उसी पाइप से उन्हें अत्यंत गंभीर चोटें आ गईं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार, प्रशासन और कंपनी ने साधी चुप्पी
हादसे के बाद बेहद गंभीर हालत में परिजन जगदीश शाह को तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे थे, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर शव का पोस्टमार्टम कराया है। अधिकारियों का कहना है कि हालांकि यह सच है कि जगदीश शाह बिना मुआवजा और बिना सहमति के टावर लगाए जाने का विरोध कर रहे थे, लेकिन मौत की असली वजह पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तरह साफ हो पाएगी। फिलहाल इस संवेदनशील मामले पर जिला प्रशासन और पावरग्रिड कंपनी की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, पुलिस रिपोर्ट के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की बात कह रही है।




