Ken-Betwa Link Project: केन-बेतवा लिंक परियोजना (Ken-Betwa Link Project) के जरिए सरकार का लक्ष्य बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना है। इसके तहत ढोड़न बांध से उत्तर प्रदेश के बरुआसागर तक लगभग 218 किलोमीटर लंबी मुख्य नहर (Main Canal) का निर्माण किया जाएगा। यह नहर छतरपुर जिले के 54 गांवों से होकर गुजरेगी, जिसके लिए भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है और अब प्रभावित किसानों को मुआवजा राशि का भुगतान किया जाना बाकी है। नई मुआवजा नीति के तहत किसानों को उनकी जमीन के सरकारी मूल्य का चार गुना भुगतान किया जाएगा, यानी एक लाख रुपये मूल्य की जमीन के बदले सरकार चार लाख रुपये तक का मुआवजा देगी।
Ken-Betwa Link Project: देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना (River Linking Project) के रूप में पहचान बना रही केन-बेतवा लिंक परियोजना (Ken-Betwa Link Project) अब छतरपुर जिले में तेजी से आकार ले रही है। परियोजना के पहले चरण में करीब 3400 करोड़ रुपये की लागत से ढोड़न बांध (Dhodhan Dam) का निर्माण किया जा रहा है। इसके बाद दूसरे चरण में जिलेभर में नहरों (Canal Network) का विस्तार किया जाएगा, जिससे बड़ी संख्या में गांवों को सिंचाई सुविधाओं (Irrigation Facilities) से जोड़ा जा सकेगा।
54 गांवों से होकर गुजरेंगी नहरें
परियोजना के तहत बनने वाली मुख्य और सहायक नहरों का सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है। अधिकारियों के अनुसार छतरपुर जिले के 54 गांवों से होकर नहर नेटवर्क विकसित किया जाएगा। इनमें सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र नौगांव तहसील का होगा, जहां करीब 21 गांव नहर मार्ग में शामिल हैं। नहरों के निर्माण से क्षेत्र में खेती के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और किसानों को लंबे समय तक लाभ मिलेगा।
ढोड़न बांध से बरुआसागर तक बनेगी 218 किलोमीटर लंबी कैनाल
सरकार का उद्देश्य केन-बेतवा परियोजना के माध्यम से पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र को सिंचाई व्यवस्था (Irrigation Infrastructure) से मजबूत करना है। इसके लिए ढोड़न बांध से उत्तर प्रदेश के बरुआसागर तक लगभग 218 किलोमीटर लंबी मुख्य कैनाल (Main Canal) बनाई जाएगी। इस मुख्य नहर से आगे माइनर और सब-माइनर नहरों (Minor Canals) का जाल बिछाया जाएगा, जिससे दूर-दराज के गांवों तक पानी पहुंचाया जा सके।
डूब क्षेत्र के प्रभावित परिवारों का किया गया पुनर्वास
परियोजना के तहत ढोड़न बांध के निर्माण से 14 गांव डूब क्षेत्र (Submergence Area) में आए हैं। इन गांवों के प्रभावित परिवारों को दूसरी जगहों पर पुनर्वासित (Rehabilitation) किया गया है। सरकार ने उनके लिए नई आवासीय कॉलोनियां विकसित की हैं और भूमि के बदले मुआवजा भी प्रदान किया है। जानकारी के अनुसार बांध परियोजना से करीब पांच हजार परिवार प्रभावित हुए हैं।
किसानों को मिलेगा जमीन के मूल्य का चार गुना मुआवजा
राज्य सरकार ने भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) से जुड़ी मुआवजा नीति में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। पहले किसानों को कलेक्टर गाइडलाइन रेट के आधार पर दोगुना मुआवजा दिया जाता था, लेकिन अब यह राशि बढ़ाकर चार गुना कर दी गई है। यानी यदि किसी भूमि का सरकारी मूल्य एक लाख रुपये है तो संबंधित किसान को चार लाख रुपये तक का मुआवजा मिलेगा। अधिकारियों के अनुसार भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब चिन्हित किसानों को भुगतान किया जाना बाकी है। यह लाभ नहर निर्माण से प्रभावित 54 गांवों के किसानों को मिलेगा।
अधिकारियों ने दी जानकारी
केन-बेतवा लिंक परियोजना की कार्यपालन यंत्री (Executive Engineer) उमा गुप्ता ने बताया कि सरकार के नए आदेश के अनुसार किसानों को उनकी जमीन का सरकारी मूल्य (Government Rate) के आधार पर चार गुना मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और जल्द ही किसानों को भुगतान किया जाएगा। साथ ही ढोड़न बांध से बरुआसागर तक बनने वाली मुख्य कैनाल से माइनर नहरों को जोड़कर व्यापक सिंचाई नेटवर्क विकसित किया जाएगा।
बुंदेलखंड में कृषि विकास को मिलेगी नई गति
विशेषज्ञों का मानना है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना के पूरा होने के बाद बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई क्षमता (Irrigation Capacity) में बड़ा इजाफा होगा। इससे खेती पर निर्भर लाखों किसानों को लाभ मिलेगा और जल संकट (Water Crisis) से जूझ रहे इलाकों में कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।




