कर्नाटक की राजनीति (Karnataka Politics) में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। दावा किया जा रहा है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (CM Siddaramaiah Resign) गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं और कांग्रेस हाईकमान उनकी जगह डिप्टी CM डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) को राज्य की कमान सौंपने की तैयारी में है। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की सियासत को गरमा दिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge, Rahul Gandhi, Siddaramaiah और D. K. Shivakumar के बीच करीब 6 घंटे लंबी बैठक हुई। इसी बैठक में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने सिद्धारमैया को राज्यसभा भेजने और दिल्ली में बड़ी राष्ट्रीय भूमिका देने का प्रस्ताव रखा है।
सूत्रों का दावा है कि सिद्धारमैया ने कुछ करीबी समर्थकों से चर्चा के बाद कहा है कि वे कांग्रेस हाईकमान का फैसला मानेंगे। इसी बीच उन्होंने गुरुवार सुबह मंत्रियों को ब्रेकफास्ट मीटिंग के लिए बुलाया है, जिसके बाद उनके इस्तीफे की अटकलें और तेज हो गई हैं। हालांकि पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इन खबरों को केवल अटकल बताया है।
दरअसल, कर्नाटक कांग्रेस में पिछले एक साल से मुख्यमंत्री पद को लेकर अंदरूनी खींचतान चल रही है। डीके शिवकुमार समर्थकों का कहना है कि 2023 में सरकार बनने के समय ढाई-ढाई साल का सत्ता फार्मूला तय हुआ था, जिसके तहत अब शिवकुमार की बारी है। हालांकि सिद्धारमैया गुट लगातार ऐसे किसी समझौते से इनकार करता रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, सिद्धारमैया शुरुआत में पद छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे। उन्होंने पार्टी नेतृत्व से कहा था कि यदि उन्हें हटाया गया तो पार्टी में बड़ी टूट हो सकती है क्योंकि कई विधायक उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे डीके शिवकुमार के नेतृत्व में काम नहीं करेंगे।
कांग्रेस नेतृत्व अब 2028 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर रणनीति बना रहा है। पार्टी सत्ता विरोधी माहौल को कम करना चाहती है और साथ ही नेतृत्व परिवर्तन भी बिना किसी बगावत के करना चाहती है। यही वजह है कि सिद्धारमैया की राजनीतिक प्रतिष्ठा को बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस सिद्धारमैया के बेटे को मंत्री पद देकर संतुलन बनाने का फार्मूला भी तलाश रही है। वहीं Priyanka Gandhi Vadra भी नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में बताई जा रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर आने वाले दिनों में कैबिनेट विस्तार होता है तो यह संकेत हो सकता है कि सिद्धारमैया अपना पूरा कार्यकाल पूरा करेंगे। वहीं यदि अचानक इस्तीफा होता है तो यह कांग्रेस हाईकमान द्वारा सत्ता परिवर्तन की साफ शुरुआत मानी जाएगी।
अब सबकी नजर गुरुवार सुबह होने वाली ब्रेकफास्ट मीटिंग पर टिकी है। अगर सिद्धारमैया इस्तीफा देते हैं तो डीके शिवकुमार का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है।




