केरल विधानसभा चुनाव के लिए 9 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले एर्नाकुलम जिले की Kalamassery Assembly Election 2026 जंग बेहद दिलचस्प हो गई है। राज्य की 140 सीटों के साथ ही इस महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र पर सबकी नजरें टिकी हैं। यहां मौजूदा विधायक और एलडीएफ उम्मीदवार पी राजीव अपनी सीट बचाने के लिए मैदान में हैं, जबकि यूडीएफ के वीई अब्दुल गफूर एक बार फिर अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रहे हैं। इस सीट का चुनावी इतिहास और मौजूदा विकास कार्य इस बार के परिणामों को काफी हद तक प्रभावित कर सकते हैं।
इतिहास और राजनीतिक समीकरण
कलमसेरी विधानसभा क्षेत्र का गठन साल 2011 में हुआ था। तब से ही यह सीट यूडीएफ और एलडीएफ के बीच एक ‘बैटलग्राउंड’ बनी हुई है। शुरुआत में इस सीट पर मुस्लिम लीग समर्थित यूडीएफ का दबदबा था, जब वीके इब्राहिम कुंजू ने जीत दर्ज की थी। हालांकि, 2021 के चुनावों में सीपीआई(एम) के पी राजीव ने करीब 50 प्रतिशत वोट हासिल कर इस किले को भेद दिया था।
विकास बनाम पुरानी विरासत
एलडीएफ इस बार अपने शासनकाल में हुए विकास कार्यों, खासकर कोच्चि कैंसर रिसर्च सेंटर और शहरी बुनियादी ढांचे में सुधार को अपनी मुख्य उपलब्धि बता रहा है। पी राजीव की छवि एक सक्रिय नेता की रही है, जिसका फायदा उन्हें मिल सकता है। वहीं, वीई अब्दुल गफूर अपने पिता की विरासत और यूडीएफ के पारंपरिक सांगठनिक ढांचे के दम पर मतदाताओं को रिझाने में जुटे हैं।
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चुनावी मुद्दे और मतदाता वर्ग
कलमसेरी केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि कोच्चि मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र का एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र भी है। यहां मध्यम वर्ग और औद्योगिक श्रमिकों की संख्या काफी अधिक है। मतदाताओं के लिए इस बार सड़क, स्वच्छता और रोजगार स्थिरता जैसे मुद्दे सबसे ऊपर हैं। पिछले कुछ वर्षों में यहां का मतदाता वर्ग पहचान-आधारित राजनीति से हटकर गवर्नेंस और सर्विस डिलीवरी की ओर झुकता दिखाई दिया है।
एनडीए की स्थिति और प्रभाव
भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाला एनडीए (NDA) इस बार बीडीजेएस के एमपी बिनु को मैदान में उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, ऐतिहासिक रूप से यहां एनडीए का वोट शेयर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 2016 में जहां यह 15.6 प्रतिशत तक पहुंचा था, वहीं 2021 में गिरकर 7.2 प्रतिशत रह गया। यदि एनडीए अपने वोट शेयर में सुधार करता है, तो यह जीत और हार के अंतर को काफी प्रभावित कर सकता है।
युवाओं और महिला मतदाताओं की भूमिका
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस बार केरल में 2.7 करोड़ से अधिक मतदाता हिस्सा लेंगे। इनमें महिला मतदाताओं की संख्या (1.38 करोड़) पुरुषों (1.31 करोड़) से अधिक है। कलमसेरी में भी पहली बार मतदान करने वाले युवाओं (18-19 आयु वर्ग) की भूमिका निर्णायक होगी, जो विकास और आधुनिक सुविधाओं को प्राथमिकता देते हैं।
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क्या एलडीएफ बरकरार रखेगी बढ़त?
सत्तारूढ़ एलडीएफ के लिए यह चुनाव साख का सवाल है। पी राजीव की रणनीति अपने रिपोर्ट कार्ड को जनता के सामने रखने की है। एलडीएफ का मानना है कि ‘एंटी-इनकंबेंसी’ के बजाय उनका ‘डेवलपमेंट प्लैंक’ मतदाताओं को आकर्षित करेगा।
यूडीएफ की वापसी की उम्मीदें
वहीं, यूडीएफ के लिए वीई अब्दुल गफूर का चेहरा एक बार फिर से अपनी पारंपरिक सीट हासिल करने का जरिया है। कांग्रेस और मुस्लिम लीग का गठबंधन जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने का दावा कर रहा है।
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