जंतर-मंतर हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- समिति को पर्याप्त सबूत नहीं मिले, शिकायतें भी कम आईं

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नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस हिंसा और मारपीट के आरोपों की जांच कर रही उच्चाधिकार प्राप्त समिति को अब तक पर्याप्त सबूत नहीं मिले हैं। शिकायतें भी उम्मीद से काफी कम दर्ज हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को समिति की रिपोर्ट पर सुनवाई के दौरान यह बात कही।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि पर्याप्त सबूतों के अभाव में समिति फिलहाल किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी है।

पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता वाली हाई पावर्ड इन्क्वायरी कमेटी (HPEC) ने कोर्ट को बताया कि शिकायत दर्ज कराने के लिए ऑनलाइन पोर्टल और ईमेल की सुविधा देने के बावजूद बहुत कम शिकायतें मिलीं। 29 अक्टूबर को हुई समिति की बैठक में केवल एक शिकायतकर्ता हलफनामे के साथ पहुंचा था।

149 अखबारों में नोटिस, फिर भी कम शिकायतें

समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, 13 अक्टूबर को शिकायत दर्ज कराने के लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया था। इस पर शिकायतकर्ता को नाम, आधार नंबर या अन्य पहचान संबंधी जानकारी देना अनिवार्य नहीं था। पोर्टल तक पहुंच केवल समिति के अध्यक्ष और संबंधित अधिकृत लोगों को दी गई थी।

इसके अलावा, देशभर के 149 अखबारों में सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित कर शिकायतें मांगी गईं। ईमेल, डाक और समिति के कार्यालय में सीधे शिकायत देने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई। 17 अक्टूबर को प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई और 21 अक्टूबर को दोबारा शिकायतें आमंत्रित की गईं। इसके बावजूद पोर्टल पर बहुत कम शिकायतें आईं। ईमेल, डाक या कार्यालय में सीधे कोई शिकायत नहीं मिली।

याचिकाकर्ताओं की सामग्री भी जांचेगी समिति

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को पीड़ितों की ओर से दाखिल वीडियो, याचिकाएं और हलफनामे समिति को सौंपने की अनुमति दी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि समिति संबंधित पक्षों से जवाब लेकर नियमित अंतराल पर अंतरिम रिपोर्ट पेश करे।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने कहा कि उन्होंने पोर्टल शुरू होने से पहले ही समिति को शिकायत दी थी। पोर्टल शुरू होने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत एक और शिकायत जमा कराई गई थी।

सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में दाखिल वीडियो और अन्य सामग्री समिति को भेजी जा सकती है, ताकि हर पीड़ित को अलग-अलग पेश न होना पड़े। हालांकि, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई।

FIR दर्ज नहीं होने और पैलेट गन के इस्तेमाल पर सवाल

तुषार मेहता ने कहा कि जनहित याचिका दायर करने वाले तीसरे पक्ष के लोग पीड़ितों की संख्या को लेकर दावा कर सकते हैं, जबकि वास्तविक संख्या अलग हो सकती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कोई 50 पीड़ितों का दावा करे, लेकिन वास्तव में संख्या केवल पांच हो।

वहीं, वृंदा ग्रोवर ने कहा कि हिंसा के मामलों में अब तक एक भी FIR दर्ज नहीं हुई है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने की अनुमति किसने दी थी। उनके मुताबिक, समिति की रिपोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से इस सवाल पर कोई जानकारी नहीं दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब समिति याचिकाकर्ताओं की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली सामग्री और संबंधित पक्षों के जवाबों के आधार पर जांच आगे बढ़ाएगी।

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