अमेरिका का क्या है मिडटर्म चुनाव, ट्रम्प की पार्टी हारी, भारतवंशी 5 लोग चुने गए सदस्य

अमेरिका। अमेरिका का मिडटर्म चुनाव जिसे भारत में मध्यावधि चुनाव कहते है। यह अमेरिका के राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के ठीक आधे समय (दो साल बाद) में कराया जाता है। इसमें अमेरिकी जनता संसद (कांग्रेस) के सदस्यों को चुनती है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पार्टी को इस मिडटर्म यानि की मध्यावधि चुनाव में शिकस्त मिली है।

435 सीटों पर होता है चुनाव

अमेरिका के मिडटर्म चुनाव यानि की मध्यावधि चुनाव में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स यानि कि निचला सदन, इसकी सभी 435 सीटों पर चुनाव होता है, जिनके सांसदों का कार्यकाल 2 साल का होता है। तो वही सीनेट की 100 सीटों में से लगभग एक-तिहाई (35 सीटों) के लिए चुनाव होता है, जिनके सीनेटरों का कार्यकाल 6 साल का होता है। इसके साथ ही कई राज्यों के गवर्नर और स्थानीय स्तर के प्रतिनिधि भी चुने जाते हैं।

ताज़ा परिणाम (नवंबर 2026)

खबरों के तहत हालिया 2026 के मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट दोनों में जीत हासिल कर ली है। इसके साथ ही डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के पास अब संसद में बहुमत नहीं रहा है और राष्ट्रपति कार्यकाल के बाकी समय के लिए अमेरिकी कांग्रेस पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण हो गया है। अब यहां सवाल यह है कि क्या ट्रम्प राष्ट्रपति पद से हट जाऐगे, तो ऐसा नही है। सिंपल शब्दों में कहें तो डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी के पास संसद में अब बहुमत नहीं है लेकिन उनकी सरकार अगले 2 और साल चलेगी (अगर उन्हें महाभियोग की प्रक्रिया के जरिए पद से हटाया जाए तो बात अलग है.)

भारतवंशी 5 लोगो ने जीत दर्ज की

अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में 5 भारतवंशी नेताओं ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के चुनाव में जीत हासिल की है। ये सभी डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य हैं। जीतने वालों में रो खन्ना, अमी बेरा, प्रमिला जयपाल, सुहास सुब्रमण्यम और पिया दांडिया शामिल हैं। इससे पहले 2024 के चुनाव में 6 भारतवंशी इस सदन के लिए चुने गए थे। इस बार सीनेट के लिए किसी भारतीय मूल के उम्मीदवार ने चुनाव नहीं लड़ा था। वहीं, गवर्नर पद के लिए भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी ने ओहायो से दावेदारी पेश की थी, लेकिन वे डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन से हार गए।

मिडटर्म चुनाव

अमेरिका का मिडटर्म चुनाव (मध्यावधि चुनाव) राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के ठीक आधे समय (दो साल बाद) कराए जाने वाले चुनाव होते हैं। इसमें अमेरिकी संसद के दोनों सदनों (प्रतिनिधि सभा / House of Representatives और सीनेट / Senate) के सदस्यों के साथ-साथ कई राज्यों के गवर्नर और स्थानीय पदों के लिए मतदान होता है। इसे वर्तमान राष्ट्रपति (जैसे डोनाल्ड ट्रंप) के कामकाज पर जनता का पहला बड़ा राजनीतिक परीक्षण माना जाता है।

ट्रंप की पार्टी की हार

  • संसद में बहुमत खोया: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को इन चुनावों में बड़ा झटका लगा है। ट्रंप की पार्टी के पास अब अमेरिकी संसद के किसी भी सदन में बहुमत नहीं बचा है। [1, 2]
  • सीनेट और हाउस पर डेमोक्रेट्स का कब्जा: सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स दोनों ही डेमोक्रेटिक पार्टी के हाथ आ गए हैं। इससे डेमोक्रेट्स को राष्ट्रपति ट्रंप के एजेंडे और उनकी नियुक्तियों को रोकने या चुनौती देने की ताकत मिल गई है।

भारतवंशी उम्मीदवारों का प्रदर्शन

  • जीत दर्ज करने वाले चेहरे: डेमोक्रेटिक पार्टी के कई भारतीय-अमेरिकी (भारतवंशी) उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है:
    • सुहास सुब्रमण्यम वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से दोबारा सांसद चुने गए हैं।
    • पिया डंडिया ने फ्लोरिडा के 22वें जिले से जीत दर्ज की है।
    • अरुणा मिलर मैरिलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर के रूप में फिर चुनी गई हैं।
    • रो खन्ना और अमी बेरा ने कैलिफोर्निया से अपनी सीटें बरकरार रखी हैं।
  • विवेक रामास्वामी को हार: ओहियो के गवर्नर पद के हाई-प्रोफाइल मुकाबले में ट्रंप समर्थित भारतीय-अमेरिकी रिपब्लिकन नेता विवेक रामास्वामी को हार का सामना करना पड़ा है।

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