जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर की पहचान बन चुकी मदन महल की बैलेंसिंग रॉक पर खतरा मंडरा रहा है। इस प्राकृतिक संरचना से महज 20 फीट की दूरी पर बहुमंजिला इमारत का निर्माण हो रहा है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आसपास की सरकारी जमीन पर कब्जे और अवैध निर्माण के आरोप लगाए हैं। वहीं, इसके संरक्षण की जिम्मेदारी को लेकर पर्यटन विभाग, पुरातत्व विभाग और नगर निगम के अधिकारियों के अलग-अलग बयान सामने आए हैं।
30 एकड़ सरकारी जमीन, अब 0.8 हेक्टेयर बचने का दावा
सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. पीजी नाजपांडे के मुताबिक, वर्ष 1910 के राजस्व रिकॉर्ड में खसरा नंबर 194 की 30 एकड़ जमीन सरकारी दर्ज थी। उनका आरोप है कि धीरे-धीरे जमीन पर कब्जे हुए और निजी स्वामित्व बढ़ता गया। अब बैलेंसिंग रॉक के आसपास केवल 0.8 हेक्टेयर सरकारी जमीन बची है।
हालांकि, जमीन के स्वामित्व में बदलाव और कथित अतिक्रमण की पुष्टि के लिए राजस्व रिकॉर्ड, नामांतरण दस्तावेज और सीमांकन रिपोर्ट की जांच जरूरी है।
1997 के भूकंप में भी नहीं हिली चट्टान
मदन महल की पहाड़ियों पर स्थित इस विशाल चट्टान का संतुलन इसे खास बनाता है। यह दूसरी चट्टान पर इस तरह टिकी है कि देखने में लगता है कि कभी भी गिर सकती है। स्थानीय स्तर पर इसे करीब 2,000 साल पुरानी प्राकृतिक धरोहर बताया जाता है, हालांकि इसकी ऐतिहासिक आयु की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
वर्ष 1997 में जबलपुर में आए 6.5 तीव्रता के भूकंप के दौरान भी यह चट्टान अपनी जगह पर बनी रही थी। अब इसके पास निर्माण होने से इसकी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है।
संरक्षण की जिम्मेदारी पर विभागों के अलग-अलग बयान
पर्यटन विभाग के रीजनल मैनेजर नवीन शर्मा ने बैलेंसिंग रॉक के संरक्षण की जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग की बताई। वहीं, पुरातत्व विभाग के सीनियर गाइड राजकुमार के मुताबिक, बैलेंसिंग रॉक उनके विभाग के अधीन नहीं है और इसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन देखता है।
दूसरी ओर, नगर निगम के भवन अधिकारी शैलेंद्र सिंह कौरव ने कहा कि उन्हें आसपास हो रहे निर्माण की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी और निर्माण अवैध पाए जाने पर कार्रवाई होगी।
मशीनों के कंपन से नुकसान की आशंका
आर्कियोलॉजिकल विशेषज्ञ मनोहर सिंह उईके ने आशंका जताई कि निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनों से पैदा होने वाला कंपन चट्टान को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने पर आसपास पानी जमा होने से जमीन प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, निर्माण से चट्टान को कितना खतरा है, इसका पता तकनीकी जांच से ही चल सकेगा।




