शुक्रवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख नेता सौरभ दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे दिल्ली के मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे और विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट के सामने पेश हुए। यह पेशी 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए अनधिकृत विरोध प्रदर्शन और शांति भंग के मामले में अदालत द्वारा दिए गए पिछले निर्देशों के अनुपालन में हुई है।
SEM कोर्ट में पेशी और नेताओं के सख्त तेवर
अदालत परिसर में प्रवेश करते समय CJP के सह-संयोजक सौरभ दास ने मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में कहा कि वे अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे। हालांकि, सुनवाई के बाद उन्होंने अंदर हुई कार्यवाही के बारे में विस्तृत जानकारी देने से इनकार कर दिया।
“मैं सभी से अनुरोध करूंगा कि एग्जीक्यूटिव कोर्ट में चल रही कार्यवाही का सम्मान करें, हम इस कार्यवाही के बारे में मीडिया के साथ कोई जानकारी साझा नहीं कर रहे हैं। और जो भी ऐसे तुरंत-तुरंत जानकारी लीक कर रहा है, उनको भी मर्यादा बनाकर रखते हुए न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए।” — सौरभ दास, सह-संयोजक, CJP
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में यह भी कहा कि यदि इस तरह की तुरंत जानकारी लीक करने का सिलसिला जारी रहा, तो पार्टी की ओर से आवश्यक कदम उठाया जा सकता है। भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी फैसला पार्टी अकेले नहीं लेगी, बल्कि आंदोलन से जुड़े सभी लोग आपसी चर्चा के बाद अगला कदम तय करेंगे। इस दौरान उन्होंने ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा तय होने की बात भी दोहराई।
‘आंदोलन जारी रहेगा’: आशुतोष रांका का बयान
कोर्ट में पेशी के बाद जब आशुतोष रांका से यह सवाल किया गया कि यदि नेताओं को हिरासत में ले लिया जाता है, तो आंदोलन कैसे आगे बढ़ेगा, तो उन्होंने दृढ़ता से जवाब दिया:
“आंदोलन जारी रहेगा। हम नेता नहीं हैं, हम उस मंच के संरक्षक हैं जो हमें इस देश के लोगों ने दिया है, और हम बस अपना सर्वश्रेष्ठ करने की कोशिश कर रहे हैं। हम जेल में रहें या बाहर, आंदोलन चलता रहेगा।” — आशुतोष रांका, CJP
उन्होंने आगे कहा कि इस पूरी व्यवस्था के काम करने के तरीके से उन्होंने काफी कुछ सीखा है और वे जरूरत के अनुसार अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए आगे बढ़ेंगे।
पूरा मामला और पृष्ठभूमि
इससे पहले बुधवार को दिल्ली के एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) ने सौरव दास और आशुतोष रांका को इस हलफनामे के आधार पर रिहा करने का आदेश दिया था कि वे शांति भंग नहीं करेंगे और जंतर-मंतर के अधिसूचित धरना स्थल न होने तक वहां विरोध-प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे।
- बॉन्ड और वेरिफिकेशन: कोर्ट ने जांच पूरी होने तक ₹50,000 का निजी बॉन्ड और जमानती बॉन्ड (surety bonds) जमा करने का निर्देश दिया था। साथ ही, पुलिस को वेरिफिकेशन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया था, जिसके तहत शुक्रवार को यह पेशी हुई।
- पिछली कानूनी कार्रवाई: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर निजी संपत्ति में अनधिकृत प्रवेश और लोक सेवकों के काम में बाधा डालने के आरोप में मामले दर्ज किए थे। पिछली सुनवाई के दौरान पुलिस ने अदालत की अवमानना का मुद्दा भी उठाया था, जिस पर वकीलों ने बिना शर्त माफी मांगी थी।
बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1: CJP के नेता मंदिर मार्ग थाने क्यों पहुंचे थे?
CJP नेता सौरभ दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे 13 अक्टूबर के जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में SEM कोर्ट के निर्देशानुसार वेरिफिकेशन और जमानत प्रक्रिया के तहत मंदिर मार्ग थाने पहुंचे थे।
Q2: SEM कोर्ट ने पिछली सुनवाई में क्या निर्देश दिए थे?
कोर्ट ने दोनों नेताओं को शांति बनाए रखने के हलफनामे और ₹50,000 के निजी व जमानती बॉन्ड पर रिहा करते हुए 23 अक्टूबर को अपनी जमानत के साथ पेश होने का आदेश दिया था।
Q3: CJP नेताओं ने मीडिया से बातचीत में क्या चेतावनी दी?
सौरभ दास ने न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करने की अपील की और अदालती कार्यवाही की जानकारी तुरंत लीक करने वालों को चेतावनी दी कि पार्टी इसके खिलाफ एक्शन ले सकती है।
Q4: नेताओं की गिरफ्तारी या हिरासत के बाद आंदोलन का क्या होगा?
आशुतोष रांका ने स्पष्ट किया है कि वे आंदोलन के संरक्षक हैं और नेता रहें या जेल जाएं, जनता द्वारा दिया गया यह आंदोलन निरंतर जारी रहेगा।
Q5: इन नेताओं के खिलाफ मुख्य रूप से कौन से आरोप दर्ज किए गए हैं?
इन पर 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर के पास एक निजी संपत्ति में अनधिकृत रूप से प्रवेश करने और लोक सेवकों के आधिकारिक कार्य में बाधा डालने का आरोप है।
निष्कर्ष और आगे की राह
मंदिर मार्ग थाने के SEM कोर्ट में CJP नेताओं की यह पेशी यह दर्शाती है कि प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रियाओं के बीच यह गतिरोध अभी भी बना हुआ है। जहां एक ओर पुलिस और प्रशासन शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कानूनी शिकंजा कस रहा है, वहीं दूसरी ओर CJP नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि वे कानूनी औपचारिकताओं का पालन करते हुए भी अपने आंदोलन को कमजोर नहीं पड़ने देंगे। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत की वेरिफिकेशन रिपोर्ट और अगली कानूनी कार्रवाई के बाद इस आंदोलन का रुख किस दिशा में आगे बढ़ता है।
Manish Kumar began his professional journey in digital marketing and performance marketing, and currently works as a Digital Marketing Excutive and SEO expert. With over 3 years of professional experience, he handles both strategy and execution. Currently, he manages digital marketing and performance marketing at ‘Shabd Sanchi’ (shabdsanchi.com).




