Iran rejects Pakistan mediate: ईरान-इजराइल और अमेरिका (Iran Israel US war) के बीच छिड़ी जंग में पाकिस्तान खुद को मेन कैरेक्टर समझ रहा है. भारत में कांग्रेस तो मोदी सरकार को यह कहकर कोस रही थी कि मोदी की विदेश निति फेल हो गई और पाकिस्तान की डिप्लोमेसी भारत से ज्यादा मजबूत हो गई. लेकिन ईरान ने आखिरकार पाकिस्तान को उसकी औकात दिखा दी है. पाकिस्तान दो देशों के बीच चल रही जंग की मध्यस्थता करके खुद को ग्लोबल साऊथ का नेता बनने चला था लेकिन ईरान ने पाकिस्तान की अगुवाई में होने वाली बातचीत में शामिल होने से कथित तौर पर इनकार कर दिया है.
दावा किया गया कि तेहरान ने इस्लामाबाद में अमेरिका से बात करने से इनकार कर दिया है. रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि टेंशन कम करने के लिए की जा रही कूटनीतिक कोशिशों को एक बड़ा झटका लगा है.
पाकिस्तान, तुर्किए और मिस्र बीते कुछ समय से अमेरिका और ईरान के बीच बैक-चैनल डिप्लोमेसी में लगे हुए हैं. 29 मार्च को इस्लामाबाद में इन देशों के विदेश मंत्रियों की बीच बैठक भी हुई, जिसमें सऊदी अरब भी शामिल रहा. इस बैठक में वाशिंगटन और तेहरान के बीच सीधी बातचीत की उम्मीद जताई गई थी. लेकिन अब ऐसा होना मुश्किल लग रहा है.
Iran ने पहले उन दावों को खारिज कर दिया था कि वह Pakistan की मदद से हो रही बातचीत में हिस्सा ले रहा है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई (Ismail Baghaei) ने कहा था कि अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं हुई है और तेहरान को मध्यस्थों के जरिए सिर्फ ‘बहुत ज्यादा और गलत मांगें’ ही मिली हैं. बयान में कहा गया,
“पाकिस्तान के मंच उनके अपने हैं. हमने उनमें हिस्सा नहीं लिया… हालांकि युद्ध को खत्म करने के लिए क्षेत्रीय अपीलों का स्वागत है, लेकिन यह याद रखना चाहिए कि इसे शुरू किसने किया था.”
Iran का रुख इन दिनों और भी कड़ा हो गया है. वह भविष्य में किसी भी मिलिट्री एक्शन के खिलाफ गारंटी, नुकसान की भरपाई और ‘होर्मुज स्ट्रेट’ पर कंट्रोल की मांग कर रहा है.




