Middle East War Impact on India: मिडल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के टेंशन और ग्लोबल मार्केट की उथल-पुथल के बीच गुरुवार को भारतीय रुपये ने शुरुआती कारोबार में थोड़ी मजबूती दिखाई है. गौरतलब है कि, अब तक के सबसे निचले स्तर से उबरते हुए, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले तकरीबन 50 पैसे की मजबूती के साथ 91.57 पर ट्रेड कर रहा है. आपको बताते चलें कि, घरेलू शेयर बाजार Sensex और Nifty में लौटी हरियाली ने रुपये को सहारा दिया है. हालांकि ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतियां बरकरार रखी हैं.
रिकॉर्ड निचले स्तर से रुपये की वापसी
बीते दिन यानी बुधवार को रुपया में जबरदस्त गिरावट देखी गई थी, जहां ये 56 पैसे टूटकर 92.05 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुई थी. जी हां गुरुवार को इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया 92.16 पर खुला, लेकिन जल्द ही रिकवरी करते हुए यह 91.30 के उच्च स्तर तक पहुंच गया. फिलहाल यह 91.57 के स्तर पर बना हुआ है. मार्केट एक्सपर्ट्स की मानें तो घरेलू इक्विटी मार्केट में सकारात्मक रुख ने निवेशकों का भरोसा थोड़ा बढ़ाया है, जिससे रुपये को अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने में मदद मिली.
वॉर की टेंशन में तप रहा है कच्चा तेल
रुपये में सुधार के बावजूद अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां चिंताजनक बनी हुई हैं. जी हां मिडल ईस्ट में संघर्ष तेज हो गया है, बुधवार को अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी युद्धपोत को डुबाने के बाद ईरान ने इजरायल पर मिसाइलें दागी हैं. इस तनाव के वजह ब्रेंट क्रूड वायदा बाजार में 2.78% उछलकर 83.66 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में तेल की सप्लाई रोकने की धमकी ने वैश्विक बाजार में डर का माहौल बना दिया है. क्योंकि भारत अपनी ईंधन जरूरतों का 85% आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में यह उछाल भारत के आयात बिल को भारी नुकसान पहुंचा सकता है.
स्टॉक मार्केट में सुधार, पर FIIs की बिकवाली जारी
इंडियन स्टॉक मार्केट में गुरुवार को मामूली बढ़त देखी गई. Sensex 212 अंक चढ़कर 79,328 के स्तर पर और Nifty 86 अंकों की बढ़त के साथ 24,567 पर कारोबार कर रहा है. हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का रुख अभी भी नकारात्मक है. एक्सचेंज डेटा के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने बुधवार को 8,752.65 करोड़ रुपये की भारी बिकवाली की. डॉलर इंडेक्स में 0.20% की मजबूती और विदेशी फंडों की लगातार निकासी रुपये की मजबूती के लिए आने वाले दिनों में बड़ी बाधा बन सकती है.
