इंदौर के दूषित जल त्रासदी से शहर की देश-विदेश में छवि हुई खराब, हाई कोर्ट की ऐसी तल्ख टिप्पणी

इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित जल से हुई मौत मामलों पर मंगलवार को एमपी हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में सुनवाई हुई। इसमें दूषित पानी से जुड़ा मामला प्रमुख रूप से उठाया गया। कोर्ट ने कहा- इस घटना ने शहर की छवि को बहुत नुकसान पहुंचाया है। इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर है, लेकिन अब दूषित पेयजल की वजह से यह पूरे भारत में चर्चा का विषय बन गया है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि देश के सबसे स्वच्छ शहर में ऐसा हो रहा, बहुत दुखद है। देश ही नहीं विदेश तक में शहर की छवि बिगड़ी है। देश का नाम खराब हो रहा है।

3 जनहित याचिकाओं पर सुनवाई

बता दें, भागीरथपुरा कांड को लेकर दाखिल तीन जनहित याचिकाओं पर मंगलवार को एक साथ सुनवाई हो रही है। याचिकाओं में मरीजों के निःशुल्क उपचार, मृतकों के स्वजनों को पर्याप्त मुआवजा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने जैसी मांगें की गई हैं। पिछली सुनवाई में कोर्ट के निर्देश पर शासन ने स्टेटस रिपोर्ट पेश की थी। मंगलवार को उसी रिपोर्ट की सामग्री और कार्रवाई को लेकर विस्तृत बहस चल रही है।

अब तक हुई 17 मौतें

ज्ञात हो कि इंदौर में दूषित पानी पीने से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। अभी अस्पतालों में 110 मरीज भर्ती हैं। अब तक कुल 421 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती किया जा चुका है। इनमें से 311 मरीज अस्पताल से डिस्चार्ज किए जा चुके हैं। आईसीयू में 15 मरीजों का इलाज चल रहा है, जबकि उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए हैं।

मुख्य सचिव हो उपस्थित

हाईकोर्ट ने कहा कि पानी का मामला इंदौर तक सीमित नही है। पानी पूरे प्रदेश का जनहित से जुड़ा मामला है। प्रदेश के लोगो को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना सरकार की जबाबदारी है। ऐसे में मुख्यसचिव वीडियों कॉनफेसिंग से उपस्थित होकर जानकारी दें।

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