India and Russia Deal : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हरकतों का असर अब रूस और भारत के रिश्ते पर पड़ना शुरू हो गया है। हाल ही में अमेरिका ने रूस के एक तेल टैंकर को समुद्री रास्ते से ही कब्जे में ले लिया। इस कारण अब रूस से भारत दूसरी अकुला क्लास परमाणु अटैक पनडुब्बी (SSN) लीज पर लेने के प्रस्ताव से वापस हटता नजर आ रहा है। इसकी वजह है INS चक्र-3 की डिलीवरी में लगातार हो रही देरी। इससे इस समझौते का ऑपरेशनल और ट्रेनिंग का लाभ काफी कम हो गया है। जिससे अब रूस भी भारत से नाराज हो सकता है।
2019 में हुआ था INS चक्र-3 के लीज एग्रीमेंट
INS चक्र-3 के लीज एग्रीमेंट की शुरुआत 2019 में हुई थी और इसकी डिलीवरी 2025 तक होने की उम्मीद थी, लेकिन रूस इससे पहले ही संकेत दे रहा है कि यह 2028 तक पहुंचेगी। IDRW.org के मुताबिक, अब सवाल उठ रहा है कि दूसरी अकुला क्लास पनडुब्बी लीज पर लेने का कितना लाभ रह गया है।
2026 के बाद पहुंचेगी दूसरी अकुला क्लास पनडुब्बी
अगर भारत दूसरी अकुला क्लास पनडुब्बी लीज पर लेने का फैसला लेता है, तो भी वह 2026 के बाद ही भारत पहुंचेगी। तब तक भारत की अपनी पहली स्वदेशी SSN ट्रायल के बहुत करीब होगी, जिससे इस लीज का फायदा सीमित रह जाएगा। इसके अलावा, लीज वाली पनडुब्बी का लाभ भी कम हो जाएगा।
INS चक्र-3 का उद्देश्य क्या है?
INS चक्र-3 का मुख्य उद्देश्य भारतीय नौसेना के क्रू को परमाणु पनडुब्बियों का संचालन, रिएक्टर का प्रबंधन और पानी के नीचे लंबे मिशन की ट्रेनिंग देना था। इसे भारत की स्वदेशी परमाणु अटैक पनडुब्बियों के आने तक एक वैकल्पिक व्यवस्था माना गया था, जिनकी तैनाती 2036-37 के आसपास होने की आशंका है।
दो स्वदेशी SSN बनाने की मंजूरी
रक्षा मंत्रालय ने पहले ही प्रोजेक्ट-77 के तहत दो स्वदेशी SSN बनाने की मंजूरी दी है, जिनका डिजाइन लगभग पूरा हो चुका है। कोचीन में अगले दो से तीन साल में इनका निर्माण शुरू होने की संभावना है और पहली स्वदेशी SSN 2034 के आसपास ट्रायल के लिए तैयार हो जाएगी।
INS चक्र-3 का उपयोग मुख्य रूप से परमाणु पनडुब्बियों के क्रू को ट्रेनिंग देने के लिए किया जाएगा, ताकि स्वदेशी SSN आने पर पहले से ही प्रशिक्षित टीमें तैयार हो सकें। इससे नई स्वदेशी SSN के लिए भी क्रू पहले से तैयार रह सकेगा। भारतीय योजनाकार अब इस दिशा में गंभीरता से विचार कर रहे हैं कि दूसरी अकुला क्लास पनडुब्बी समय पर नहीं आ पाएगी और उसकी लागत भी उचित ठहराना मुश्किल है। इसलिए, अब मुख्य ध्यान मौजूदा लीज वाली पनडुब्बी से अधिक से अधिक ट्रेनिंग हासिल करने और स्वदेशी SSN कार्यक्रम को तेज करने पर केंद्रित है।
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