Income Tax। भारत में इनकम टैक्स (आयकर) की शुरुआत 24 जुलाई 1860 को ब्रिटिश सरकार द्वारा की गई थी। वर्तमान में भारत में आयकर का संचालन आयकर अधिनियम, 1961 के तहत किया जाता है, जो 1 अप्रैल 1962 से पूरे देश में प्रभावी हुआ था।
ऐसे हुई थी इंकम टैक्स की शुरूआत
देश में टैक्स प्रणाली आजादी के पहले की है और इसकी शुरूआत अंग्रेज सरकार ने 1857 की क्रांति (सिपाही विद्रोह) के कारण हुए भारी वित्तीय नुकसान की भरपाई करने और ब्रिटिश शासन के खर्चे पूरे करने के लिए एक अस्थायी कर के रूप में लागू किया गया था।
1922 से ऐसे चल रही इंकम टैक्स की व्यवस्था
इंकम टैक्स की व्यवस्था का जो दौर चल रहा है वह 100 साल से ज्यादा का हो गया, दरअसल असहयोग आंदोलन के समय 1922 में भारत में नया इनकम टैक्स कानून आया। इसी समय आयकर विभाग के विकास की कहानी भी शुरू हुई। नए कानून में आयकर अधिकारियों को अलग-अलग नाम दिए गए। 1946 में पहली बार परीक्षा के जरिए आयकर अधिकारियों की सीधी भर्ती हुई। इसी परीक्षा को ही 1953 में इंडियन रेवेन्यू सर्विस यानी आईआरएस नाम दिया गया।
1963 में आया यह कानून
1963 तक आयकर विभाग के पास संपत्ति कर, सामान्य कर, प्रवर्तन निदेशालय जैसे प्रशासनिक काम थे। इसलिए 1963 में राजस्व अधिनियम केंद्रीय बोर्ड कानून आया, जिसके तहत केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) का गठन किया गया। 1970 तक टैक्स की बकाया राशि वसूल करने का अधिकार विभाग के राज्य प्राधिकारियों के पास था। लेकिन, 1972 में टैक्स वसूली के लिए नई विंग बनाई गई और कमिश्नर नियुक्त किए गए। इनकम टैक्स कानून में समय-समय पर बदलाव होते रहते हैं।
मुख्य बिंदु
पहले इनकम टैक्स अधिकारी- भारत में आयकर की अवधारणा ब्रिटिश अर्थशास्त्री सर जेम्स विल्सन द्वारा लाई गई थी। उन्होंने ही 1860 में देश का पहला बजट पेश किया और उसमें आयकर कानून जोड़ा।
आरंभिक कर स्लैब- शुरुआत में सालाना केवल 200 रुपये तक कमाने वालों को टैक्स से छूट दी गई थी। 200 रुपये से 500 रुपये तक की आय पर 2 प्रतिशम और 500 रुपये से अधिक की आय पर 4 प्रतिशत टैक्स वसूला जाता था।
आधुनिक प्रणाली का आधार- समय-समय पर कानूनों में कई बदलाव होते रहे।
क्या है इंकम टैक्स
इनकम टैक्स या आयकर वह प्रत्यक्ष कर है, जो सरकार द्वारा व्यक्तियों और व्यवसायों द्वारा एक वित्तीय वर्ष में अर्जित आय या लाभ पर लगाया जाता है। सरकारें इस टैक्स से प्राप्त राजस्व का उपयोग सार्वजनिक सेवाओं (जैसे सड़कें, अस्पताल, शिक्षा) को फंड करने, सरकारी योजनाओं और देश के विकास के लिए करती हैं।
आय के स्रोत- यह वेतन, व्यापार से मुनाफे, पूंजीगत लाभ (जैसे शेयर या प्रॉपर्टी की बिक्री), और निवेश पर प्राप्त ब्याज आदि पर लगाया जाता है। आमतौर पर यह प्रोग्रेसिव होता है, अर्थात जैसे-जैसे किसी व्यक्ति की आय बढ़ती है, उस पर लगने वाले टैक्स की दर भी बढ़ती जाती है। सरकार करदाताओं की आय को अलग-अलग श्रेणियों में बांटती है। भारत में करदाताओं के लिए कर व्यवस्था मौजूद है।
12 लाख रूपए तक इंकम वालों को टैक्स मुक्त
वर्तमान समय में टैक्स के लिए जो मापदंड बनाए गए है। उसके तहत 12 लाख रूपए तक इंकम वालों टैक्स मुक्त रखा गया है। इनकम टैक्स रिटर्न यह एक प्रकार का फॉर्म होता है, जिसे करदाता अपनी आय और टैक्स की गणना करके सरकार (आयकर विभाग) के पास जमा करते हैं। यदि किसी व्यक्ति की आय कर योग्य सीमा से अधिक है, तो उसके लिए फार्म भरना अनिवार्य है। जो लोग टैक्स-सेविंग स्कीमों में निवेश करते हैं, उन्हें सरकार द्वारा कर में छूट भी प्रदान की जाती है।




