रीवा। रीवा के एक निजी अस्पताल में ईलाज करा रहे रामपुर बघेलान निवासी रमेश शर्मा को इलाज के लिए रीवा से लखनऊ ले जाया गया। मीडिया खबरों के तहत मरीज को समय पर एयरपोर्ट पहुचाने की जिम्मेदारी पुलिस और प्रशासन को सौपी गई। इसके लिए पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर बनाया और 60 वर्षीय बुजूर्ग को रीवा के एयरपोर्ट पहुचाया गया। जंहा से उन्हे एयर एम्बुलेंस की मदद से उच्चस्तरीय ईलाज के लिए लखनऊ रवाना किया गया।
पुलिस और एम्बुलेंस की अंहम भूमिका
मरीज के गंभीर हालत में समय पर पहुचाना जंहा अंहम होता है वही इस चुनौती को रीवा पुलिस और एम्बुलेंस ने स्वीकार किया। रीवा पुलिस ने इसके लिए ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया। रास्ते में यातायात को व्यवस्थित रखने के लिए प्रमुख स्थानों पर पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। इसका उद्देश्य एंबुलेंस को रास्ते में जाम या अन्य यातायात बाधाओं का सामना किए बिना एयरपोर्ट तक पहुंचाना था।
रास्ते पर लगाए गए थें पुलिस कर्मी
बिना रूकावट के एम्बुलेंस को एयरपोर्ट पहुचाने के लिए व्यवस्था के तहत अस्पताल से एयरपोर्ट तक के मार्ग पर ट्रैफिक को नियंत्रित किया गया। पुलिसकर्मियों की तैनाती और यातायात प्रबंधन के कारण एंबुलेंस को करीब 10 मिनट में एयरपोर्ट पहुंचा दिया गया। खबरों के तहत इसके लिए रास्तों पर तकरीबन 32 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी। पुलिस और प्रशासन ने समन्वय बनाकर रास्ते को सुगम रखने की व्यवस्था की, जिससे मरीज को समय पर एयरपोर्ट पहुंचाया जा सके।
जाने क्या है ग्रीन कॉरिडोर
चिकित्सा और आपातकालीन स्थिति में यह अस्पताल और ट्रैफिक पुलिस के आपसी सहयोग से बनाया जाने वाला एक विशेष और अस्थायी रास्ता होता है। जिसका उद्देश्य, जब किसी गंभीर मरीज को जल्दी अस्पताल पहुंचाना हो या अंग प्रत्यारोपण के लिए हृदय, लीवर या किडनी जैसे दान किए गए अंगों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक बिना किसी देरी के ले जाना हो, तब इस रास्ते का उपयोग होता है।
ऐसे करता है काम
ग्रीन कॉरिडोर के रास्ते पर पड़ने वाले सभी ट्रैफिक सिग्नल्स को पुलिस द्वारा मैन्युअल रूप से हरा कर दिया जाता है और अन्य वाहनों को रोक दिया जाता है। इससे एम्बुलेंस को बिना किसी रुकावट के कम से कम समय में सफर पूरा करने में मदद मिलती है।




