मौसम न्यूज। अब शीत ऋतु शुरू हो गई है, यानि की ठंड का महीना चालू हो गया है। आखिर मौसम का यह बदलाव होता कैसे है। गर्मी पड़ रही होती और फिर ठंड शुरू हो जाती है। बारिश सामाप्त होती है ठंड का एहसास होने लगता है। इस तरह के सवाल हर किसी के दिमाक में अक्सर होते है। अब ठंड पड़ना शुरू हो गई हैं तो ऐसे में जानेगे कि ठंड कैसे पड़ती है।
पृथ्वी और सूर्य से ऋतु परिवर्तन का रिश्ता
पृथ्वी पर ऋतु परिवर्तन और ठंड का पड़ना मुख्य रूप से पृथ्वी के अक्षीय झुकाव और सूर्य के चारों ओर उसकी परिक्रमा पर निर्भर करता है। जब पृथ्वी की स्थिति ऐसी होती है कि भारत या उत्तरी गोलार्ध सूर्य से दूर झुकने लगता है, तो सूर्य की किरणें तिरछी हो जाती हैं। तिरछी किरणों को वायुमंडल में अधिक दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे उनकी गर्मी कम हो जाती है। मौसम के जानकारों की माने तों ठंड होने का एक कारण यह भी है कि सर्दियों में दिन की अवधि छोटी हो जाती है और रातें लंबी होती हैं। जमीन और वातावरण को सूर्य की गर्मी कम समय के लिए मिलती है, लेकिन रातें लंबी होने के कारण ऊष्मा (गर्मी) अंतरिक्ष में ज्यादा तेजी से निकल जाती है, जिससे तापमान गिर जाता है। सूर्य की रोशनी कम मिलने से जमीन और वायुमंडल ठंडे हो जाते हैं, जिससे वातावरण में सिहरन और ठंडक बढ़ जाती है।
फिर कैसे बढ़ने लगती है तेज ठंड
मौसम में तेज ठंड बढ़ने के पीछे कई मौसमी (क्लाइमैटिक) और शारीरिक कारण होते हैं। सर्दियों में उत्तर भारत में पहाड़ों पर होने वाली बर्फबारी और ठंडी हवाएं मैदानों की तरफ आती हैं, जिससे तापमान तेजी से गिरता है। जब हवाएं तेज चलती हैं, तो वे हमारी त्वचा की नमी को तेजी से सुखाती हैं, जिससे हमें और अधिक ठंड महसूस होती है। रात में बादल न होने से धरती की गर्मी अंतरिक्ष में तेजी से निकल जाती है (रेडिएशन), जिससे सुबह के समय गलन और कोहरा बढ़ जाता है।
ठंड में क्या होता है अच्छा क्या होता खराब
ठंड के मौसम में शरीर और सेहत पर कई अच्छे और बुरे प्रभाव पड़ते हैं। इस मौसम में पाचन शक्ति थोड़ी बेहतर होती है, जिससे खाया हुआ खाना आसानी से पच जाता है। सुहावने और ठंडे मौसम में आलस्य कंम होता है और बाहर घूमने या काम करने में अधिक ऊर्जा मिलती है। गर्मियों की तरह चिपचिपाहट और पसीने से राहत रहती है। शरीर को अंदर से गर्म रखने के लिए मेटाबॉलिज्म बढ़ता है, जिससे थोड़ी बहुत प्राकृतिक रूप से कैलोरी बर्न होती है।




