रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से प्रशासन और प्रबंधन की मनमानी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। शहर के प्रसिद्ध अटल पार्क में बुधवार को पार्क प्रबंधन की तानाशाही उस वक्त देखने को मिली, जब कवरेज करने गए ‘शब्द सांची’ के रिपोर्टर और कैमरामैन को मुख्य एंट्री गेट पर ही रोक लिया गया। सुरक्षाकर्मियों ने कवरेज करने से रोकने के लिए एक बेतुका और अजीब तर्क दिया कि पार्क के अंदर कैमरा ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। यदि कैमरे को अंदर ले जाना है, तो इसके एवज में 500 रुपये की अवैध फीस चुकानी होगी।
जिम्मेदारों का गैर-जिम्मेदाराना रवैया और मनमाना तर्क
मीडिया कर्मियों ने सुरक्षाकर्मियों को बार-बार यह स्पष्ट किया कि वे किसी निजी शूटिंग के लिए नहीं, बल्कि पार्क में मौजूद युवाओं से बातचीत कर न्यूज कवरेज करने के उद्देश्य से अंदर जा रहे हैं। इसके बावजूद सुरक्षाकर्मियों ने उनकी एक बात नहीं सुनी और न ही उन्हें पार्क प्रबंधन के किसी उच्च अधिकारी से बात करने की अनुमति दी। मौके पर मौजूद मीडिया टीम के साथ इस तरह का अड़ियल और असहयोगपूर्ण रवैया चर्चा का विषय बन गया है।
नियमों का अभाव और दोहरे मापदंड
हैरानी की इस घटना का सबसे बड़ा पहलू यह है कि पार्क के अंदर ऐसा कोई भी लिखित सूचना बोर्ड या नियम चस्पा नहीं है, जो कैमरे पर प्रतिबंध या इस तरह के किसी शुल्क की पुष्टि करता हो। इसके उलट, हकीकत यह है कि पार्क के भीतर आम पर्यटकों और नागरिकों द्वारा खुलेआम मोबाइल फोन से वीडियो बनाए जाते हैं और सोशल मीडिया के लिए रील्स शूट की जाती हैं। ऐसे में सिर्फ पेशेवर मीडिया कर्मियों को निशाना बनाना प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय पत्रकारों में भारी रोष
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को उनके पेशेवर कर्तव्यों के निर्वहन से रोकने और इस तरह सरेआम अवैध वसूली की मांग किए जाने से स्थानीय पत्रकारों और मीडिया जगत में भारी रोष व्याप्त है। पत्रकारों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच और अटल पार्क प्रबंधन की इस तानाशाही के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।




