MP: हाई कोर्ट ने 117 करोड़ के चैंबर-पार्किंग प्रोजेक्ट पर जताया संतोष, कार पूलिंग और पार्किंग अनुशासन पर जारी किए अहम निर्देश

MP High Court Jabalpur: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट, जबलपुर की युगलपीठ ने 117 करोड़ रुपये की लागत वाले अधिवक्ता चैंबर और मल्टीलेवल पार्किंग (Multi-Level Parking Project) से जुड़ी याचिका का निपटारा करते हुए परिसर में बढ़ते पार्किंग संकट और यातायात प्रबंधन को लेकर महत्वपूर्ण गाइडलाइन जारी की हैं। अदालत ने अधिवक्ताओं से कार पूलिंग (Car Pooling) अपनाने तथा पिक एंड ड्रॉप (Pick and Drop System) व्यवस्था को बढ़ावा देने की अपेक्षा जताई। साथ ही स्पष्ट किया कि केवल नई पार्किंग सुविधाएं विकसित करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है, बल्कि प्रभावी ट्रैफिक मैनेजमेंट (Traffic Management) और यातायात अनुशासन का पालन भी उतना ही आवश्यक है।

MP High Court Jabalpur News: हाई कोर्ट के सामने प्रस्तावित 117 करोड़ रुपये की लागत वाले अधिवक्ता चैंबर और मल्टीलेवल पार्किंग (Multi-Level Parking) प्रोजेक्ट को लेकर दायर जनहित याचिका का गुरुवार को महत्वपूर्ण दिशा-निर्देशों के साथ निपटारा कर दिया गया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने परियोजना की प्रगति पर संतोष जताते हुए याचिका समाप्त कर दी, हालांकि अधिवक्ता चैंबर निर्माण में हुई देरी पर असंतोष भी व्यक्त किया।

टेंडर प्रक्रिया शुरू, इसलिए याचिका का औचित्य नहीं रहा

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि हाई कोर्ट के गेट नंबर-4 के सामने आधुनिक अधिवक्ता चैंबर (Advocate Chamber) और बहुस्तरीय पार्किंग निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है तथा टेंडर जारी कर दिए गए हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि परियोजना अमल की दिशा में बढ़ रही है, इसलिए याचिका को लंबित रखने का कोई विशेष कारण नहीं बचता। हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में परियोजना को लेकर राज्य सरकार की ओर से अनावश्यक विलंब किया जाता है तो याचिकाकर्ता दोबारा न्यायालय की शरण ले सकता है।

पार्किंग संकट और ट्रैफिक प्रबंधन पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट परिसर के आसपास बढ़ते ट्रैफिक (Traffic Management) और पार्किंग संकट को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। अदालत ने कहा कि केवल नई पार्किंग सुविधाएं विकसित कर देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि यातायात अनुशासन और बेहतर प्रबंधन भी उतना ही जरूरी है।

कोर्ट ने सरकारी अधिकारियों को निर्देश दिए कि न्यायालय परिसर के आसपास अनावश्यक वाहन खड़े करने की बजाय पिक एंड ड्रॉप (Pick and Drop System) व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाए। साथ ही अधिवक्ताओं को भी कार पूलिंग (Car Pooling) जैसी व्यवस्था अपनाने की सलाह दी गई, जिससे सड़क पर वाहनों का दबाव कम किया जा सके।

ट्रैफिक पुलिस को निगरानी बढ़ाने के निर्देश

युगलपीठ ने यातायात पुलिस को भी क्षेत्र की नियमित निगरानी करने और पार्किंग नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। अदालत का मानना है कि व्यवस्थित पार्किंग और यातायात अनुशासन से ही न्यायालय परिसर में बढ़ती भीड़भाड़ को नियंत्रित किया जा सकता है।

भूमिपूजन के बाद भी शुरू नहीं हुआ था निर्माण

गौरतलब है कि 4 मई 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी, न्यायमूर्ति एस.सी. शर्मा, न्यायमूर्ति सूर्यकांत तथा तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत की उपस्थिति में इस महत्वाकांक्षी परियोजना का भूमिपूजन किया गया था। इसके बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं होने पर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने चिंता व्यक्त करते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

कोर्ट का संदेश: सिर्फ पार्किंग नहीं, व्यवहार में भी बदलाव जरूरी

अदालत के निर्देशों से साफ संकेत मिला है कि न्यायालय परिसर की ट्रैफिक समस्या का समाधान केवल इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure Development) बढ़ाने से नहीं होगा। कार पूलिंग, पिक एंड ड्रॉप संस्कृति और यातायात नियमों के पालन जैसी व्यवस्थाओं को अपनाना भी आवश्यक है। इसी वजह से एक साधारण प्रतीत होने वाली याचिका अब न्यायालय परिसर की भविष्य की ट्रैफिक और पार्किंग व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मिसाल बन गई है।

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