भारतीय सर्राफा बाजार में बुधवार को सोने और चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल देखने को मिला। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर की कमजोरी के कारण घरेलू बाजार में दोनों कीमती धातुओं के दाम ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गए हैं। मुंबई और अन्य प्रमुख शहरों में निवेशकों की सुरक्षात्मक खरीदारी ने कीमतों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है।
रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे घरेलू दाम
मुंबई के सर्राफा बाजार में सोने की कीमतें अब 1.7 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर के आसपास कारोबार कर रही हैं। चांदी की बात करें तो यह 3.7 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर को छूती नजर आ रही है। वायदा बाजार (MCX) पर भी इसका गहरा असर दिखा, जहां फरवरी डिलीवरी वाला सोना 1.65 लाख रुपये के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया।

ईरान संकट और अमेरिका की धमकी का असर
कीमतों में इस अचानक तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण मध्य पूर्व (West Asia) में बढ़ता तनाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने बाजार में खलबली मचा दी है। राष्ट्रपति ने संकेत दिए हैं कि अमेरिकी नौसेना का एक बड़ा बेड़ा ईरान को परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए बातचीत की मेज पर लाने के उद्देश्य से क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है। युद्ध की आशंका ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर धकेला है।
डॉलर की कमजोरी ने दिया सहारा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर इंडेक्स में शुरुआती गिरावट ने सोने को और मजबूती प्रदान की। आमतौर पर जब डॉलर कमजोर होता है, तो अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए सोना सस्ता हो जाता है, जिससे इसकी मांग और कीमतें बढ़ जाती हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना 5,300 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गया है, जबकि चांदी 113 डॉलर प्रति औंस के करीब कारोबार कर रही है।
औद्योगिक मांग में भारी बढ़ोतरी
चांदी की कीमतों में उछाल का एक कारण केवल भू-राजनीति नहीं, बल्कि इसकी बढ़ती औद्योगिक मांग भी है। इलेक्ट्रिक वाहन (EV), सेमीकंडक्टर, सोलर पैनल और स्मार्ट ग्रिड जैसे उभरते क्षेत्रों में चांदी का बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सप्लाई चेन की चिंताओं और बढ़ती खपत ने चांदी को सोने के मुकाबले अधिक वोलेटाइल और तेज बना दिया है।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर तनाव कम नहीं होता, तब तक कीमतों में स्थिरता आने की संभावना कम है। हालांकि, ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली (Profit booking) भी देखी जा सकती है। मिड-टर्म निवेशकों को गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनानी चाहिए, लेकिन इस समय बाजार में भारी उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है।

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