गणेश उत्सव। गणेश चतुर्थी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। यह त्योहार भारत के विभिन्न भागों में मनाया जाता है किन्तु महाराष्ट्र व कर्नाटका में बडी़ धूमधाम से मनाया जाता है। पुराणों के अनुसार इसी दिन भगवान श्री गणेश जी का जन्म हुआ था। गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेशजी की पूजा की जाती है। कई प्रमुख जगहों पर भगवान गणेश की बड़ी प्रतिमा स्थापित की जाती है। इस प्रतिमा का नौ दिनों तक पूजन किया जाता है। बड़ी संख्या में आस पास के लोग दर्शन करने पहुँचते है। नौ दिन बाद गानों और बाजों के साथ गणेश प्रतिमा को किसी तालाब, महासागर इत्यादि जल में विसर्जित किया जाता है। गणेशजी को लंबोदर के नाम से भी जाना जाता है।
गणेश पूजा का क्या है महत्वं
हिन्दू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूजनीय माना गया है और किसी भी शुभ कार्य या अनुष्ठान से पहले गणेश पूजा करना अनिवार्य माना जाता है। भगवान गणेश को सभी विघ्नों और बाधाओं को दूर करने वाला देवता कहा जाता है। मान्यता है कि उनकी पूजा करने से जीवन और कार्यों में आने वाली रुकावटें खत्म होती हैं। उनका हाथी का सिर और बड़ा मस्तक बुद्धिमत्ता, विवेक और एकाग्रता का प्रतीक माना जाता है। गणेश जी की आराधना से घर में सुख, शांति, धन और सौभाग्य का आगमन होता है। किसी भी नए काम, व्यापार या गृह प्रवेश की शुरुआत श्री गणेश नाम से ही की जाती है ताकि कार्य बिना किसी परेशानी के पूरा हो ।
इस लिए मनाया जाता है 10 दिन तक उत्सव
गणेश चतुर्थी का उत्सव भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू हो जाता है और यह उत्सव 10 दिनों तक चलता है। इस उत्सव का सामापन अनंत चतुर्दशी ठीक 10 दिनों में किया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, महर्षि वेद व्यास ने महाभारत ग्रंथ लिखने के लिए भगवान गणेश से प्रार्थना की थी। गणेश जी ने शर्त रखी कि व्यास जी बिना रुके कथा सुनाएंगे और कलम नहीं रुकेगी। गणेश जी ने लगातार 10 दिनों तक बिना विश्राम किए कथा लिखी। लगातार लिखने से गणेश जी के शरीर का तापमान बहुत बढ़ गया था। 10वें दिन अनंत चतुर्दशी पर उनका तापमान सामान्य करने के लिए उन्हें सरोवर में स्नान कराया गया था। इसी घटना की याद में 10 दिनों तक उत्सव मनाकर विसर्जन किया जाता है।
तिथियों का संयोग
यह पर्व भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होता है। इसका समापन चतुर्दशी तिथि (अनंत चतुर्दशी) पर होता है। पंचांग की इन दोनों तिथियों के बीच की अवधि लगभग 10 से 11 दिन की होती है। इन 10 दिनों में लोग बप्पा को अतिथि के रूप में घर लाकर समुदाय और परिवार में उल्लास मनाते हैं। पेशवा काल से गणेशोत्सव को सार्वजनिक रूप से मनाने की परंपरा चली आ रही है। स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने इसे समाज में एकता लाने और जन आंदोलन का रूप दिया।




