FATF Grey List Pakistan Economy: फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ग्रे लिस्ट में एक बार फिर पाकिस्तान का नाम शामिल होने का खतरा मंडरा रहा है। भारत की लगातार कूटनीतिक कोशिशों और ठोस सबूतों के बाद FATF ने 18 जून 2025 को अपनी स्ट्रासबर्ग बैठक में पाकिस्तान पर कड़ी नजर रखने का फैसला किया। यह चौथी बार होगा जब पाकिस्तान ग्रे लिस्ट में शामिल हो सकता है, जिससे उसकी पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो सकता है। (Keywords: )
भारत की रणनीति और पहलगाम हमला:
भारत ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले (26 लोगों की मौत) का हवाला देकर पाकिस्तान पर आतंकवाद को वित्तीय सहायता देने का आरोप लगाया। भारत ने FATF को एक विस्तृत डोजियर सौंपा, जिसमें मसूद अजहर जैसे आतंकियों को पाकिस्तान में सरकारी संरक्षण और आतंकी फंडिंग के सबूत शामिल थे। FATF ने पहली बार किसी भारतीय आतंकी हमले की निंदा करते हुए कहा, “ऐसे हमले बिना वित्तीय सहायता के संभव नहीं हैं।” भारत ने ऑपरेशन सिंदूर (मई 2024 में भारत-पाक तनाव के बाद) के बाद से पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डालने की मुहिम तेज की थी।
ग्रे लिस्ट का मतलब और प्रभाव:
FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल देशों पर कड़ी वित्तीय निगरानी होती है, क्योंकि वे मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग रोकने में कमजोर माने जाते हैं। पाकिस्तान पहले 2008-2010, 2012-2015, और 2018-2022 तक ग्रे लिस्ट में रह चुका है। 2018-2022 के दौरान उसकी जीडीपी में 1.5% की कमी आई, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 50% तक गिर गया, और वैश्विक क्रेडिट रेटिंग्स डाउनग्रेड हुईं। अगर पाकिस्तान फिर ग्रे लिस्ट में आया, तो:
- विश्व बैंक और IMF जैसे संस्थानों से 20 बिलियन डॉलर का प्रस्तावित लोन रुक सकता है।
- विदेशी निवेश और व्यापार में भारी कमी आएगी।
- पाकिस्तानी रुपये पर दबाव बढ़ेगा, जिससे महंगाई और बेरोजगारी बढ़ सकती है।
पाकिस्तान का पक्ष और चीन की भूमिका:
पाकिस्तान ने दावा किया कि भारत ने उसे बदनाम करने के लिए FATF में “राजनीतिक दबाव” बनाया। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा, “हमने 2022 में ग्रे लिस्ट से बाहर आने के लिए 27-पॉइंट एक्शन प्लान पूरा किया और अब भी एशिया-पैसिफिक ग्रुप (APG) के साथ काम कर रहे हैं।” हालांकि, चीन ने FATF में पाकिस्तान का समर्थन किया और ग्रे लिस्ट में शामिल करने के भारत के प्रस्ताव का विरोध किया। सूत्रों के अनुसार, चीन ने पाकिस्तान की “तकनीकी प्रगति” का हवाला दिया।
विपक्ष और घरेलू प्रतिक्रिया:
पाकिस्तान में विपक्षी नेता इमरान खान की PTI ने सरकार पर FATF की शर्तों का पालन न करने का आरोप लगाया। इस्लामाबाद में विरोध प्रदर्शन हुए, जहां प्रदर्शनकारियों ने कहा, “ग्रे लिस्ट का मतलब आम जनता के लिए और मुश्किलें हैं।” सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी यूजर्स ने इसे “भारत की साजिश” करार दिया, जबकि कुछ ने सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया।
FATF की अगली बैठक अक्टूबर 2025 में होगी, जहां पाकिस्तान के ग्रे लिस्ट में शामिल होने पर अंतिम फैसला हो सकता है। भारत ने विश्व बैंक की जून 2025 की बैठक में भी पाकिस्तान को फंडिंग रोकने का मुद्दा उठाने का फैसला किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पाकिस्तान ग्रे लिस्ट में आया, तो उसकी अर्थव्यवस्था को उबरने में 3-5 साल लग सकते हैं।
यह घटनाक्रम भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है, साथ ही वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की साख को गहरा झटका लग सकता है।




