रीवा। रीवा जिले के गढ़, परासी, टिकुरी और लालगांव क्षेत्र में बन रही नहर में घटिया सामग्री के प्रयोग और व्यापक भ्रष्टाचार को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और किसानों का आक्रोश चरम पर पहुँच गया है। करोड़ों की लागत से बन रही इस नहर के निर्माण में नियमों को ताक पर रखकर लीपापोती करने का आरोप लगा है, जिससे क्षेत्र के किसानों में भारी असंतोष व्याप्त है।
बालू की जगह क्रेसर डस्ट का बेधड़क इस्तेमाल
क्षेत्र के समाजसेवी लवकुश तिवारी, सुनील पांडेय, श्रवण मिश्रा, रमेश तिवारी, दीपनारायण पांडे, बृजेश सिंह और आशीष तिवारी ‘निर्मल’ सहित कई ग्रामीणों ने निर्माण एजेंसी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदार द्वारा गुणवत्ता मानकों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। निर्माण में प्रयुक्त की जाने वाली अच्छी बालू की जगह क्रेसर से निकलने वाली अनुपयोगी और घटिया डस्ट का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके साथ ही संरचनात्मक मजबूती के लिए तय मानकों से बेहद पतले सरियों का प्रयोग कर खानापूर्ति की जा रही है।
पानी भरे होने के बावजूद जारी है घटिया प्लास्टर
हद तो तब हो गई जब नहर में बारिश का पानी भरा होने के बावजूद बिना पानी निकाले ही घटिया सामग्री से ढलाई और प्लास्टर का काम जारी रखा गया। इसका नतीजा यह है कि बनते ही नहर की नींव और दीवारों (प्लास्टर) में अभी से मोटी-मोटी दरारें साफ उभर आई हैं। किसानों का कहना है कि यह निर्माण पहली ही बारिश में पूरी तरह ढह जाएगा और इसका सीधा नुकसान क्षेत्र के किसानों को भुगतना पड़ेगा।
उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
भ्रष्टाचार के इस खेल से नाराज क्षेत्र के किसानों और समाजसेवियों ने साफ किया है कि यदि गुणवत्ता में तत्काल सुधार नहीं किया गया तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराने, निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और दोषी ठेकेदारों व जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की है।




