श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने गुरुवार रात 2:55 बजे श्रीहरिकोटा से GSLV-F17 रॉकेट के जरिए EOS-05 इमेजिंग सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह भारत का पहला सैटेलाइट है, जो करीब 36 हजार किमी की ऊंचाई पर जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में रहकर तस्वीरें लेगा। इससे पहले भारत के इमेजिंग सैटेलाइट मुख्य रूप से निचली कक्षाओं में तैनात रहे हैं।
EOS-05 के जरिए बड़े इलाकों की तस्वीरें सीधे हासिल की जा सकेंगी। इससे बड़े चक्रवात, बाढ़, बादल फटने और अन्य प्राकृतिक आपदाओं पर नजर रखने में मदद मिलेगी। इसके अलावा सीमावर्ती इलाकों में होने वाली गतिविधियों की निगरानी में भी सैटेलाइट उपयोगी हो सकता है। इसकी खासियत यह है कि यह एक बड़े क्षेत्र की तस्वीरें ले सकता है और किसी इलाके को बार-बार देखने में मदद करेगा। इससे जमीन पर होने वाले बदलावों की भी जानकारी मिल सकेगी।
ISRO का यह करीब 8 महीने बाद पहला लॉन्च है। इससे पहले जनवरी 2026 और मार्च 2025 में उसके दो मिशन सफल नहीं हो पाए थे। इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने बताया कि ISRO की इस साल छह और मिशन लॉन्च करने की योजना है।
ट्रांसफर ऑर्बिट में पहुंचा EOS-05
GSLV-F17 की उड़ान भारत के Geosynchronous Satellite Launch Vehicle की 19वीं उड़ान थी। EOS-05 को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के सेकेंड लॉन्च पैड से रवाना किया गया।
लॉन्च के करीब 18 मिनट बाद EOS-05 को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में पहुंचाया गया। इसके बाद सैटेलाइट को करीब 36,000 किमी की ऊंचाई पर मौजूद अपनी अंतिम कक्षा तक पहुंचना है।
क्या होती है जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट?
जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट पृथ्वी से करीब 35,786 किमी ऊपर की कक्षा है। इसमें सैटेलाइट पृथ्वी का एक चक्कर लगभग 24 घंटे में पूरा करता है। यानी उसकी कक्षीय गति पृथ्वी के घूमने की गति के साथ तालमेल में रहती है।
वहीं, LEO यानी लो-अर्थ ऑर्बिट पृथ्वी के काफी करीब होती है और आमतौर पर 2,000 किमी से कम ऊंचाई पर होती है। यहां सैटेलाइट बहुत तेज गति से पृथ्वी का चक्कर लगाता है। इसलिए वह किसी एक इलाके के ऊपर थोड़े समय के लिए ही रहता है।
जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट का फायदा यह है कि सैटेलाइट भारत और आसपास के बड़े इलाके पर लगातार नजर रखने में मदद कर सकता है। इसकी तस्वीरों और डेटा से चक्रवात, भारी बारिश, बाढ़ और जंगल की आग जैसे खतरों की पहचान, निगरानी और नुकसान का आकलन तेजी से किया जा सकेगा।
दो खास कैमरों से बड़े इलाके की निगरानी
EOS-05 में दो मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजर लगाए गए हैं। ये ऐसे कैमरे हैं, जो धरती की तस्वीरें अलग-अलग तरह की प्रकाश तरंगों में लेते हैं। इससे सामान्य तस्वीरों के अलावा जमीन, पेड़-पौधों, पानी और पर्यावरण में हो रहे बदलावों की जानकारी मिल सकती है। इनमें से एक इमेजर की रिजॉल्यूशन 42 मीटर प्रति पिक्सल है। यानी तस्वीर का एक पिक्सल जमीन के करीब 42×42 मीटर हिस्से की जानकारी देता है। EOS-05 की खासियत बेहद छोटी चीजों की बारीक तस्वीर लेना नहीं, बल्कि करीब 36 हजार किमी की ऊंचाई से बड़े इलाके की तस्वीरें बार-बार लेना है। इससे किसी क्षेत्र में समय के साथ होने वाले बदलावों को समझने में मदद मिलेगी।
2021 में GISAT-1 मिशन हुआ था फेल
अगस्त 2021 में इसरो ने GSLV-F10 के जरिए GISAT-1 लॉन्च करने की कोशिश की थी। क्रायोजेनिक स्टेज में रॉकेट को तकनीकी समस्या आने के बाद मिशन सफल नहीं हो पाया था। इसके चलते सैटेलाइट अपनी तय ऑर्बिट तक नहीं पहुंच सका GISAT-1 को जियोस्टेशनरी ऑर्बिट से भारतीय उपमहाद्वीप की करीब-करीब रियल टाइम इमेजिंग के लिए तैयार किया गया था।




