रीवा: अफसरों की ‘अमर्यादित’ भाषा और मानसिक प्रताड़ना के खिलाफ फूटा कर्मचारियों का गुस्सा, कलेक्टर ने दिखाई सख्ती

Employees' anger erupted against officers' 'indecent' language and mental torture in Rewa

रीवा। जिले के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में आज कामकाज पूरी तरह ठप रहा। संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर जिले की सभी जनपद पंचायतों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने एक दिवसीय सामूहिक अवकाश लेकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों का यह आक्रोश विभाग में थोपे जा रहे अव्यवहारिक लक्ष्यों, वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उपयोग की जा रही अभद्र भाषा और साप्ताहिक अवकाश के दिनों में भी जबरन ड्यूटी कराए जाने के विरोध में फूटा है। प्रदर्शनकारियों ने जिला पंचायत कार्यालय में एकत्रित होकर जमकर नारेबाजी की और प्रशासन पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया।

कर्मचारियों का कहना है कि प्रशासन द्वारा थोक में कारण बताओ नोटिस जारी करने, वेतन कटौती, वेतन वृद्धि रोकने और सेवा समाप्ति जैसे दंडात्मक आदेशों के जरिए डर का माहौल पैदा किया जा रहा है। कार्यस्थल का वातावरण इतना तनावपूर्ण हो गया है कि कर्मचारियों के लिए काम करना मुश्किल हो रहा है। आंदोलनकारी कर्मचारियों ने आयुक्त बी.एस. जामोद को ज्ञापन सौंपकर इन दंडात्मक कार्यवाहियों पर रोक लगाने की मांग की है। आयुक्त ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया है कि वे उनकी जायज समस्याओं को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा करेंगे और बीच का रास्ता निकालेंगे।

वहीं, इस पूरे मामले पर कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि “हम जनता के सेवक हैं, इसलिए हमें जनता के काम करने ही पड़ेंगे।” कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि यदि कर्मचारियों को कोई समस्या है तो संवाद के जरिए उसका निराकरण किया जाएगा, लेकिन सरकार द्वारा संचालित जनहितैषी विकास योजनाओं की प्रगति में कोई बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दूसरी ओर, जिला पंचायत सीईओ मेहताब सिंह गुर्जर ने बताया कि ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को लेकर समय सीमा में काम पूरा करने के निर्देश दिए गए थे, क्योंकि जिले की प्रगति किसी भी हाल में कम नहीं होनी चाहिए। फिलहाल, प्रशासन की सख्ती और कर्मचारियों की नाराजगी के बीच जिले में विकास कार्यों की गति पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

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