प्रेमानंद महाराज का भावुक संदेश, मैं रहूं न रहूं, हमेशा साथ रहूंगा, स्थगित हुई पदयात्रा

वृंदावन। सुविख्यात संत प्रेमानंद महाराज का भावुक संदेश सामने आ रहा है। जिसमें वे अपने भक्तों और शिष्यों को संदेश देते हुए कह रहे है कि हम मिलें न मिलें, बोलें न बोलें, हम आप सबको बहुत प्यार करते हैं, बिल्कुल चिंता मत करो। महाराज जी यही तक नही रूके और उन्होने अपने संदेश में कहा कि उनका एकांतवास उनके भक्तों के लिए है। अब उनका जो कुछ भी हो रहा है, वह शिष्यों के कल्याण के लिए हो रहा है। ज्ञात हो कि वृदावन के महान संत प्रेमानंद महाराज के करोड़ों भक्त है और महाराज जी का इस तरह से भावुक संदेश आने के बाद भक्तों की चिंता बढ़ गई है।

खूब करें भजन

संत प्रेमानंद महाराज ने भक्तों से कहा है कि खूब भजन करो, नाम जप करो, आश्रित रहो और सुखी रहो। हमारा जब मन होगा, तब हम बोल देंगे।”महाराज ने अपने अनुयायियों से निश्चिंत और निर्भय होकर भक्ति में लगे रहने की अपील किए।

रोकी गई है पदयात्रा

महाराज जी की पदयात्रा हमेशा चर्चा में रहती हैं, लेकिन पिछले 9 दिनों से उनकी पदयात्रा बंद है, ज्ञात हो कि वे रात में अपने भक्तों के साथ पैदल यात्रा करते है, जबकि हर दिन तड़के 3 बजे वह केली कुंज आश्रम से सौभरी वन तक करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल यात्रा करते थे। उनकी पदयात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल होते थे। प्रेमनंद महाराज की स्वास्थ्य कारणों से पदयात्रा फिलहाल बंद गई है। शिष्यों के मुताबिक प्रेमानंद महाराज की दोनों किडनी खराब हैं। उन्हें हफ्ते में 2 से 3 बार डायलिसिस कराना पड़ता है। इसी वजह से डॉक्टरों ने उन्हें आराम की सलाह दिए है।

यूपी में हुआ था प्रेमनंद महाराज का जन्म

प्रेमानंद महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के अखरी गांव में हुआ था। बचपन में उनका नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था। आध्यात्म की ओर झुकाव होने के कारण उन्होंने मात्र 13 साल की उम्र में घर छोड़ दिया था।काशी में उन्होंने ब्रह्मचर्य जीवन बिताया और गुरु गौरी शरण महाराज से दीक्षा ली। बाद में वह वृंदावन पहुंचे और राधावल्लभ संप्रदाय से जुड़ गए।

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